Vighnaraja Sankashti Chaturthi Vrat Katha Hindi: आज विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का पर्व है। यह पर्व हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से गणेश जी की कृपा मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन भक्त व्रत रखकर भगवान गणेश के ‘विघ्नराज’ रूप की पूजा करते हैं। रात में चांद निकलने पर उसकी पूजा करके ही यह व्रत खोला जाता है। अगर आप यह व्रत रख रहे हैं, तो इसका पूरा फल पाने के लिए यह कहानी जरूर पढ़ें या सुनें।
विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

पुरानी कथाओं के अनुसार, बाणासुर की बेटी उषा ने एक दिन सपने में अनिरुद्ध को देखा। उन्हें देखते ही उषा को उनसे प्यार हो गया और वह उनसे मिलना चाहती थी। उसने अपनी सहेली चित्रलेखा से उस व्यक्ति को ढूंढने को कहा। चित्रलेखा ने अपनी कला से कई लोगों की तस्वीरें बनाईं। जब उषा ने अनिरुद्ध की तस्वीर देखी, तो उसने तुरंत पहचान लिया कि सपने में उसने इसी को देखा था।
उषा की जिद पूरी करने के लिए उसकी सहेली चित्रलेखा अनिरुद्ध को ढूंढते हुए द्वारका पहुंच गई। अपनी जादुई शक्तियों से उसने अनिरुद्ध को ढूंढ लिया और उन्हें बाणासुर के महल में ले आई।
उषा की जिद पूरी करने के लिए उसकी सहेली चित्रलेखा अनिरुद्ध को ढूंढते हुए द्वारका पहुंच गई। अपनी जादुई शक्तियों से उसने अनिरुद्ध को ढूंढ लिया और उन्हें बाणासुर के महल में ले आई।
इधर, अनिरुद्ध के अचानक गायब होने से उनका पूरा परिवार परेशान हो गया। उनके पिता प्रद्युम्न बहुत दुखी हुए। भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी को भी जब यह बात पता चली, तो वे बहुत चिंता में पड़ गए।
इस परेशानी का हल निकालने के लिए श्रीकृष्ण ने लोमश मुनि से मुलाकात की और उन्हें अनिरुद्ध के गायब होने की पूरी बात बताई। मुनि ने बताया कि अनिरुद्ध बाणासुर की कैद में है। उसे वापस लाने के लिए उन्होंने श्रीकृष्ण को गणेश जी का व्रत रखने और उनकी सच्चे मन से पूजा करने की सलाह दी।
इस परेशानी का हल निकालने के लिए श्रीकृष्ण ने लोमश मुनि से मुलाकात की और उन्हें अनिरुद्ध के गायब होने की पूरी बात बताई। मुनि ने बताया कि अनिरुद्ध बाणासुर की कैद में है। उसे वापस लाने के लिए उन्होंने श्रीकृष्ण को गणेश जी का व्रत रखने और उनकी सच्चे मन से पूजा करने की सलाह दी।
मुनि की बात मानकर श्रीकृष्ण ने यह व्रत रखा और गणेश जी की पूजा की। इसके बाद उन्होंने बाणासुर के साथ युद्ध किया। इस युद्ध में बाणासुर हार गया और श्रीकृष्ण अनिरुद्ध को सुरक्षित वापस ले आए। युद्ध में बाणासुर के कई हाथ भी कट गए थे। श्रीकृष्ण की इस जीत को गणेश जी के इसी व्रत के चमत्कार से जोड़कर देखा जाता है। कहा जाता है कि जो कोई भी इस व्रत को रखता है और व्रत कथा का पाठ करता है, उसके सभी विघ्न दूर हो जाते हैं।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
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