Vighnaraja Sankashti Chaturthi 2026: इस कथा के बिना अधूरा है विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत, बप्पा की कृपा पाने के लिए जरूर करें पाठ

Summary :

यह कहानी विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी व्रत और उसके फायदों के बारे में है। यह त्योहार हर साल भादो महीने में मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने और व्रत रखने से घर में खुशहाली आती है और जीवन की सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं। रात को चांद देखने के बाद ही यह व्रत खोला जाता है। व्रत की कहानी के मुताबिक, बाणासुर की बेटी उषा ने एक रात सपने में श्रीकृष्ण के पोते अनिरुद्ध को देखा और उसे उनसे प्यार हो गया। अपनी सहेली की मदद करने के लिए, उषा की सहेली चित्रलेखा ने अपने जादू से अनिरुद्ध को द्वारका से उठाया और बाणासुर के महल में पहुंचा दिया।

Vighnaraja Sankashti Chaturthi Vrat Katha Hindi: आज विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का पर्व है। यह पर्व हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से गणेश जी की कृपा मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन भक्त व्रत रखकर भगवान गणेश के ‘विघ्नराज’ रूप की पूजा करते हैं। रात में चांद निकलने पर उसकी पूजा करके ही यह व्रत खोला जाता है। अगर आप यह व्रत रख रहे हैं, तो इसका पूरा फल पाने के लिए यह कहानी जरूर पढ़ें या सुनें।

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

Vighnaraja Sankashti Chaturthi Vrat Katha Hindi
Vighnaraja Sankashti Chaturthi Vrat Katha Hindi (AI Generated)
पुरानी कथाओं के अनुसार, बाणासुर की बेटी उषा ने एक दिन सपने में अनिरुद्ध को देखा। उन्हें देखते ही उषा को उनसे प्यार हो गया और वह उनसे मिलना चाहती थी। उसने अपनी सहेली चित्रलेखा से उस व्यक्ति को ढूंढने को कहा। चित्रलेखा ने अपनी कला से कई लोगों की तस्वीरें बनाईं। जब उषा ने अनिरुद्ध की तस्वीर देखी, तो उसने तुरंत पहचान लिया कि सपने में उसने इसी को देखा था।
उषा की जिद पूरी करने के लिए उसकी सहेली चित्रलेखा अनिरुद्ध को ढूंढते हुए द्वारका पहुंच गई। अपनी जादुई शक्तियों से उसने अनिरुद्ध को ढूंढ लिया और उन्हें बाणासुर के महल में ले आई।
इधर, अनिरुद्ध के अचानक गायब होने से उनका पूरा परिवार परेशान हो गया। उनके पिता प्रद्युम्न बहुत दुखी हुए। भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी को भी जब यह बात पता चली, तो वे बहुत चिंता में पड़ गए।
इस परेशानी का हल निकालने के लिए श्रीकृष्ण ने लोमश मुनि से मुलाकात की और उन्हें अनिरुद्ध के गायब होने की पूरी बात बताई। मुनि ने बताया कि अनिरुद्ध बाणासुर की कैद में है। उसे वापस लाने के लिए उन्होंने श्रीकृष्ण को गणेश जी का व्रत रखने और उनकी सच्चे मन से पूजा करने की सलाह दी।
मुनि की बात मानकर श्रीकृष्ण ने यह व्रत रखा और गणेश जी की पूजा की। इसके बाद उन्होंने बाणासुर के साथ युद्ध किया। इस युद्ध में बाणासुर हार गया और श्रीकृष्ण अनिरुद्ध को सुरक्षित वापस ले आए। युद्ध में बाणासुर के कई हाथ भी कट गए थे। श्रीकृष्ण की इस जीत को गणेश जी के इसी व्रत के चमत्कार से जोड़कर देखा जाता है। कहा जाता है कि जो कोई भी इस व्रत को रखता है और व्रत कथा का पाठ करता है, उसके सभी विघ्न दूर हो जाते हैं।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
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Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।