चंडीगढ़ : लावारिस पशुओं व गोवंश के बारे में सूचना न देना राज्य के सभी एडीसी समेत गो सेवा आयोग, शहरी निकाय, पंचायती राज व पुलिस निदेशालय को महंगा पड़ गया। राज्य सूचना आयोग ने सोमवार को राज्य के सभी जिलों के एडीसी को पेश होने का आदेश दिया है। मामले में समालखा के आरटीआइ कार्यकर्ता पीपी कपूर ने हरियाणा में गाय, बैल, सांड, आदि लावारिश पशुओं के कारण हो रही दुर्घटना के चलते हरियाणा गो सेवा आयोग से 11 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। इस सूचना को तमाम जिलों के अतिरिक्त उपायुक्तों, शहरी स्थानीय निकाय, पुलिस मुख्यालय, पंचायती राज निदेशालय, गो सेवा आयोग व पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने देना था।
पशुपालन विभाग के अलावा किसी ने सूचना नहीं दी। आरटीआइ के जवाब में अभी तक प्राप्त सूचना से खुलासा हुआ है कि पिछले पांच वर्षों से हरियाणा में गो सेवा आयोग का बजट 45 लाख से बढ़कर 30 करोड़ हुआ। फिर भी सरकार प्रदेश को लावारिस पशुओं के खतरे से मुक्त नहीं करा सकी, जबकि हरियाणा सरकार ने पहले गत वर्ष 15 अगस्त 2018 तक व फिर 1 जनवरी 2019 तक पूरे प्रदेश को लावारिस पशुओं से मुक्त करने का लक्ष्य बनाया था, लेकिन यह अभियान दोनों बार विफल रहा।
अकेले सिरसा की गोशालाओं में 10,722 गोवंश की मौत हो गई। बावजूद इसके सरकार व गोसेवा आयोग सोए रहे। जानकारी न देने पर पिछली सुनवाई पर आयोग ने शहरी निकाय, पंचायती राज व पुलिस निदेशालय पर 15 हजार रूपये का जुर्माना भी लगाया था।


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