दक्षिण के राज्यों में बढ़ रहा गोद लेने का चलन, गुजरात की बड़ी छलांग, पंजाब हरियाणा सबसे नीचे, ओवर-ऑल 1 साल में 11% बढ़ोतरी

Summary :

देश में बच्चों को गोद लेने के मामले में बीते एक साल में करीब 11% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। महाराष्ट्र हलकी गिरावट के साथ टॉप पर बना हुआ है, जबकि गुजरात ने रिकॉर्ड छलांग लगाई है। वहीं पंजाब और हरियाणा में आंकड़ों में गिरावट आई है।

India Adoption Trends
India Adoption Trends : देश में अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को अपना नया घर और परिवार दिलाने की मुहिम में पिछले एक साल में काफी तेजी देखने को मिली है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025-26 के दौरान केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण यानी CARA के माध्यम से देशभर में कुल 5,022 बच्चों को नया घर मिला है।
यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 4,515 के मुकाबले करीब 11 प्रतिशत ज्यादा है। राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र लगातार दूसरे साल सबसे आगे बना हुआ है, जबकि गुजरात ने गोद लेने की रफ्तार में सबको हैरान करते हुए साढ़े तीन गुना से भी ज्यादा की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की है।

अडॉप्टशन के आंकड़े: कहां कितनी हुई बढ़ोतरी?

राज्य वर्ष 2024-25 वर्ष 2025-26 स्थिति / रुझान
महाराष्ट्र 849 792 हल्की गिरावट के बावजूद टॉप पर
गुजरात 156 547 सबसे बड़ी छलांग 
तमिलनाडु 465 501 पोजिटिव चेंज
कर्नाटक 306 377 सुधार
तेलंगाना 267 307 पोजिटिव चेंज
उत्तर प्रदेश 205 231 मामूली बढ़ोतरी
मध्य प्रदेश 133 221 सुधार
राजस्थान 160 172 धीमी गति

इन राज्यों में आई भारी गिरावट

राज्य वर्ष 2024-25 वर्ष 2025-26 असर
पंजाब 109 49 50% से ज्यादा की कमी
हरियाणा 91 68 गोद लेने की दर में गिरावट
पश्चिम बंगाल 328 237 आंकड़ों में बड़ा अंतर

डिजिटल व्यवस्था और नए नियम से प्रक्रिया हुई आसान

मिशन वात्सल्य और CARINGS सिस्टम का असर

सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि गोद लेने की पूरी प्रोसेस को अब मिशन वात्सल्य पोर्टल के तहत पूरी तरह से डिजिटाइज कर दिया गया है।
  • जिला मजिस्ट्रेट (DM) को अधिकार: कोर्ट के चक्कर काटने की जगह अब जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत डीएम को सीधे अडॉप्शन ऑर्डर जारी करने की पावर दी गई है, जिससे सालों तक लटकने वाले मामले अब चंद महीनों में निपट रहे हैं।
  • 795 विशेष एजेंसियां: देशभर में 29 जुलाई 2026 तक 795 Specialized Adoption Agencies (SAAs) को मंजूरी दी जा चुकी है।
  • रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: डॉक्यूमेंटेशन से लेकर मैचिंग तक सब कुछ ऑनलाइन होने से फर्जीवाड़े और गैर-कानूनी गोद लेने की प्रथा पर लगाम लगी है।
संसद में सांसद पीपी चौधरी समेत अन्य सदस्यों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए सरकार ने बताया कि कानूनी तरीके से बच्चों को अपनाने के लिए लगातार प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के जरिए अवेयरनेस कैंपेन चलाए जा रहे हैं, ताकि हर बच्चे को सुरक्षित और सुरक्षित भविष्य मिल सके।

Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।