India Adoption Trends : देश में अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को अपना नया घर और परिवार दिलाने की मुहिम में पिछले एक साल में काफी तेजी देखने को मिली है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025-26 के दौरान केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण यानी CARA के माध्यम से देशभर में कुल 5,022 बच्चों को नया घर मिला है।
यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 4,515 के मुकाबले करीब 11 प्रतिशत ज्यादा है। राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र लगातार दूसरे साल सबसे आगे बना हुआ है, जबकि गुजरात ने गोद लेने की रफ्तार में सबको हैरान करते हुए साढ़े तीन गुना से भी ज्यादा की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की है।
अडॉप्टशन के आंकड़े: कहां कितनी हुई बढ़ोतरी?
| राज्य | वर्ष 2024-25 | वर्ष 2025-26 | स्थिति / रुझान |
| महाराष्ट्र | 849 | 792 | हल्की गिरावट के बावजूद टॉप पर |
| गुजरात | 156 | 547 | सबसे बड़ी छलांग |
| तमिलनाडु | 465 | 501 | पोजिटिव चेंज |
| कर्नाटक | 306 | 377 | सुधार |
| तेलंगाना | 267 | 307 | पोजिटिव चेंज |
| उत्तर प्रदेश | 205 | 231 | मामूली बढ़ोतरी |
| मध्य प्रदेश | 133 | 221 | सुधार |
| राजस्थान | 160 | 172 | धीमी गति |
इन राज्यों में आई भारी गिरावट
| राज्य | वर्ष 2024-25 | वर्ष 2025-26 | असर |
| पंजाब | 109 | 49 | 50% से ज्यादा की कमी |
| हरियाणा | 91 | 68 | गोद लेने की दर में गिरावट |
| पश्चिम बंगाल | 328 | 237 | आंकड़ों में बड़ा अंतर |
डिजिटल व्यवस्था और नए नियम से प्रक्रिया हुई आसान
मिशन वात्सल्य और CARINGS सिस्टम का असर
सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि गोद लेने की पूरी प्रोसेस को अब मिशन वात्सल्य पोर्टल के तहत पूरी तरह से डिजिटाइज कर दिया गया है।
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जिला मजिस्ट्रेट (DM) को अधिकार: कोर्ट के चक्कर काटने की जगह अब जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत डीएम को सीधे अडॉप्शन ऑर्डर जारी करने की पावर दी गई है, जिससे सालों तक लटकने वाले मामले अब चंद महीनों में निपट रहे हैं।
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795 विशेष एजेंसियां: देशभर में 29 जुलाई 2026 तक 795 Specialized Adoption Agencies (SAAs) को मंजूरी दी जा चुकी है।
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रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: डॉक्यूमेंटेशन से लेकर मैचिंग तक सब कुछ ऑनलाइन होने से फर्जीवाड़े और गैर-कानूनी गोद लेने की प्रथा पर लगाम लगी है।
संसद में सांसद पीपी चौधरी समेत अन्य सदस्यों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए सरकार ने बताया कि कानूनी तरीके से बच्चों को अपनाने के लिए लगातार प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के जरिए अवेयरनेस कैंपेन चलाए जा रहे हैं, ताकि हर बच्चे को सुरक्षित और सुरक्षित भविष्य मिल सके।



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