Haryana News: दिल्ली के बाद अब हरियाणा में भी शिक्षकों को स्कूलों और विश्वविद्यालयों में आवारा कुत्तों की निगरानी की ड्यूटी देने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। कैथल जिले में शिक्षक धरने पर बैठ गए और उन्होंने साफ कहा कि उनका काम बच्चों को पढ़ाना है, न कि कुत्तों की देखरेख करना।
Haryana News: अध्यापकों ने किया विरोध
शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में पहले ही बहुत कम स्टाफ है और बच्चों की पढ़ाई का दबाव बहुत ज्यादा है। ऐसे में कुत्तों की निगरानी जैसे गैर-शैक्षणिक काम उन्हें करना न्यायसंगत नहीं है। उनका मानना है कि यह कदम शिक्षा के अधिकार और अध्यापकों की गरिमा दोनों के लिए हानिकारक है।

Haryana News Today: अनुराग ढांडा का भाजपा पर निशाना
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि भाजपा सरकार न तो शिक्षा की चिंता करती है और न ही अध्यापकों के सम्मान की। हरियाणा की शिक्षा प्रणाली पहले से ही कमजोर है, लेकिन सरकार उसके सुधार के बजाय शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों में लगा रही है।
Anurag Dhanda News: सरकारी आंकड़े और स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में लगभग 14 हजार सरकारी स्कूल हैं, जबकि 30 हजार से ज्यादा शिक्षक पद खाली हैं। लगभग 85 से 90 प्रतिशत स्कूल बिना स्थायी हेडमास्टर के चल रहे हैं। कई स्कूलों में 400 से 500 बच्चों पर केवल एक शिक्षक है। इसके बावजूद, 24 दिसंबर 2025 को कैथल जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश दिया कि हर स्कूल में आवारा कुत्तों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी बनाया जाए।

विश्वविद्यालय में भी आदेश लागू
मामला केवल स्कूल तक सीमित नहीं है। रोहतक स्थित महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय में भी प्रोफेसरों को परिसर में आवारा कुत्तों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई। इससे साफ है कि सरकार शिक्षा संस्थानों को पढ़ाई के बजाय निगरानी और प्रशासन का केंद्र बना रही है।
ढांडा ने उठाया सवाल
अनुराग ढांडा ने सवाल उठाया कि जब 70 से 75 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में स्थायी चौकीदार तक नहीं हैं और कई जगह एक चौकीदार को कई स्कूलों की जिम्मेदारी दी गई है, तो शिक्षक पर कुत्तों की निगरानी का भार क्यों डाला जा रहा है। उनका कहना है कि अगर सच में कुत्तों की समस्या का समाधान करना है, तो हर स्कूल और कॉलेज में अलग से पाली या एनिमल कंट्रोल स्टाफ की भर्ती क्यों नहीं की जाती।

शिक्षा और अध्यापकों का सम्मान
ढांडा ने कहा कि सरकार को तय करना होगा कि हरियाणा में शिक्षक पढ़ाएँ या कुत्तों की देखरेख करें। अध्यापकों को बीएलओ, चौकीदार और अब कुत्तों का रखवाला बनाना, उनके पद की गरिमा पर चोट है। यह सिर्फ अध्यापकों का नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।
आम आदमी पार्टी की मांग
आम आदमी पार्टी ने कहा है कि कुत्तों की निगरानी के लिए अलग से सरकारी भर्ती निकाली जाए और अध्यापकों को इस अपमान से बचाया जाए। शिक्षा को बोझ और शिक्षकों को मजदूर समझने वाली यह सोच हरियाणा की जनता अब बर्दाश्त नहीं करेगी।
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