Haryana News: हरियाणा में नशे को लेकर हालात को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है। गांवों से लेकर शहरों तक यह चर्चा तेज है कि नशीले पदार्थ अब छुपकर नहीं, बल्कि खुले तौर पर बेचे जा रहे हैं। खासतौर पर युवाओं में इंजेक्शन और ‘चिट्टा’ जैसे खतरनाक नशों का चलन बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल उठता है, आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है और इसे रोकने के लिए ठोस कदम कौन उठाएगा?
हरियाणा के कई इलाकों में नशे की समस्या को लेकर लोगों में चिंता साफ दिखाई दे रही है। माता-पिता अपने बच्चों को लेकर डरे हुए हैं। गांवों में बेरोजगारी और गलत संगत के कारण कई युवा नशे की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि नशा बेचने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे उनका मनोबल बढ़ रहा है।
Haryana News: पुलिसकर्मी की पोस्ट से मचा हड़कंप
इसी बीच हरियाणा के एक पुलिसकर्मी सुनील संधू की सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। उन्होंने दावा किया कि वे नशे के खिलाफ कार्रवाई कर रहे थे, लेकिन उन पर ही दबाव बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि कुछ बड़े अधिकारी उन्हें तस्करों को छोड़ने के लिए कह रहे हैं और मना करने पर कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं।
अगर कोई पुलिसकर्मी, जो कानून लागू करने की जिम्मेदारी निभाता है, खुद को असुरक्षित महसूस करे, तो यह सिर्फ व्यक्तिगत मामला नहीं रह जाता। यह पूरे प्रशासनिक ढांचे पर सवाल खड़े करता है। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
विपक्ष का सरकार पर हमला
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने इस मुद्दे पर हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को घेरा है। उनका कहना है कि जब से पंजाब में नशे के खिलाफ सख्त अभियान शुरू हुआ है, तब से तस्करों ने हरियाणा को नया ठिकाना बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर कोई ईमानदार अधिकारी नशे के खिलाफ कार्रवाई करता है, तो उसे संरक्षण नहीं मिलता। विपक्ष का कहना है कि सरकार को ऐसे मामलों में सख्ती दिखानी चाहिए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कदम उठाने चाहिए।
पंजाब मॉडल का जिक्र
पंजाब में 2022 के बाद भगवंत मान सरकार ने नशे के खिलाफ अभियान चलाने का दावा किया। वहां बड़े सप्लायरों की गिरफ्तारी और संपत्तियों की जब्ती की खबरें सामने आईं। आम आदमी पार्टी इसे अपनी सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति का उदाहरण बताती है। इसी आधार पर विपक्ष हरियाणा में भी वैसी ही कार्रवाई की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि अगर पड़ोसी राज्य में सख्ती हो सकती है, तो हरियाणा में क्यों नहीं?
राजनीतिक आरोप बनाम जमीनी हकीकत
हालांकि, नशे का मुद्दा सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह समाज और भविष्य से जुड़ा सवाल है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित रहें और उन्हें रोजगार के अवसर मिलें। गांवों और कस्बों में लोग चाहते हैं कि युवाओं के हाथ में काम हो, न कि नशे की सुई। सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए ठोस रणनीति बनाएं। साथ ही, अगर किसी पुलिसकर्मी ने गंभीर आरोप लगाए हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
आगे की राह
नशे की समस्या से निपटने के लिए सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। सख्त कानून, पारदर्शी जांच और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर जरूरी हैं। समाज, सरकार और प्रशासन को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा। आज जरूरत इस बात की है कि आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर ठोस कार्रवाई की जाए। क्योंकि नशा किसी पार्टी या विचारधारा को नहीं पहचानता, लेकिन सही नीतियां और मजबूत इरादा जरूर बदलाव ला सकते हैं। अब सबकी नजर हरियाणा सरकार पर है कि वह युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाती है।


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