चंडीगढ़ : हरियाणा में दस साल तक मुख्यमंत्री रह चुके भूपेंद्र सिंह हुड्डा की लड़ाई अब निर्णायक दौर में है। कांग्रेस संगठन में बिखराव से आहत हुड्डा समर्थक विधायकों ने जहां हाईकमान पर प्रदेश की कमान अपने नेता को सौंपने का दबाव बना रखा है, वहीं विधानसभा चुनाव से पहले हुड्डा टिकट बांटने की जिम्मेदारी अपने हाथों में रखना चाहते हैं, ताकि सत्ता पर दावेदारी बरकरार रहे।
अपनी इसी रणनीति के तहत हुड्डा 18 अगस्त को रोहतक में महा परिवर्तन रैली के जरिये हाईकमान को अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी में हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुड्डा की महा परिवर्तन रैली पर कांग्रेस हाईकमान के साथ-साथ सत्तारूढ़ भाजपा, इनेलो, जजपा, बसपा और आम आदमी पार्टी की भी निगाह टिकी हुई है। हुड्डा की रैली में जुटने वाली भीड़ हाईकमान की नजरों में उनका राजनीतिक कद तय करेगी। साथ ही भाजपा को यह आकलन करने का मौका देगी कि उसके सामने चुनावी रण में खड़ी पार्टी कितनी मजबूत है।
हरियाणा में कांग्रेस के 17 विधायक हैं, जिनमें से 13 विधायक हुड्डा समर्थक हैं। प्रदेश कांग्रेस की कमान पिछले पांच छह साल से अशोक तंवर के पास है। हुड्डा समर्थक विधायकों का आरोप है कि इन छह साल में तंवर न तो संगठन ख़ड़ा कर पाए और न ही विधायकों को साथ लेकर चले। प्रदेश में जिला व ब्लाक अध्यक्ष तक नहीं हैं। इसलिए अब चूंकि विधानसभा चुनाव हैं तो हुड्डा को पूरी पावर दी जानी चाहिए।


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