नशा मुक्त भारत के मिशन में ‘मानस’ निभा रहा अहम भूमिका, जानें मादक पदार्थों के विरुद्ध कैसे करता है मदद?

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Manas : मानस नशा मुक्त भारत के मिशन में अहम भूमिका निभा रहा है। नशीले पदाथों और मादक पादार्थों से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरों ने डिजिटल इंडिया कॉरपोर्शन डीआईसी की मदद से 2024 को मानस का शुभारंभ किया था। नागरिक मादक पदार्थ से संबंधित सूचनाएं दे सकते हैं। कई माध्यम से इस प्लेटफॉर्म तक पहुंचा जा सकता है। इसमें राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1933, आधिकारिक वेब पोर्टल, ई – मेल तथा उमंग ऐप शामिल है। इससे नागरिकों को सीधे तौर पर नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और तस्करी के विरुद्ध अभियान से जोड़ता है। मानस ऐसा मंच है,…

Manas : मानस नशा मुक्त भारत के मिशन में अहम भूमिका निभा रहा है। नशीले पदाथों और मादक पादार्थों से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरों ने डिजिटल इंडिया कॉरपोर्शन डीआईसी की मदद से 2024 को मानस का शुभारंभ किया था। नागरिक मादक पदार्थ से संबंधित सूचनाएं दे सकते हैं।

कई माध्यम से इस प्लेटफॉर्म तक पहुंचा जा सकता है। इसमें राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1933, आधिकारिक वेब पोर्टल, ई – मेल तथा उमंग ऐप शामिल है। इससे नागरिकों को सीधे तौर पर नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और तस्करी के विरुद्ध अभियान से जोड़ता है।

मानस ऐसा मंच है, जिसमें नागरिक को सूचना दर्ज कराने, परामर्श काउंसलिंग प्राप्त करने और जन जागरुकता बढ़ाने जैसी सुविधाएं देता है। कोई भी नागरिक मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री, अवैध खेती जैसी जानकारी देता है तो उसकी पहचान गोपनीय रखी जाती है, जो व्यक्ति नशे की लत से प्रभावित हैं। वे परामर्श और सहायता ले सकते हैं।

अधिकारिता मंत्रालय का हेल्पलाइन 14446

उनकी कॉल सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के हेल्पलाइन 14446 पर भेज दी जाती है। ये सेवाएं हर समय उपलब्ध हैं। सेवाओं को अधिक समावेशी और व्यापक बनाया जा रहा है। इसमें बहुभाषी कॉल सहायता, समार्ट आईवीआरएस, चैटबॉट एकीकरण तथा क्षेत्रीय भाषाओं में सहायता शामिल है। नशे की लत से ग्रस्त व्यक्ति को सरकारी नशामुक्ति केंद्र में चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

नागरिक अपनी पहचान गोपनीय रखकर मादक पादार्थों की जानकारी साझा कर सकते हैं। इसने नागरिकों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सूचना का आदान – प्रदान आसान कर दिया है। देशभर में परामर्श (काउंसलिंग), पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) तथा जन-जागरूकता सेवाओं तक लोगों की पहुँच सरल कर दी है। वहीं डिजिटल माध्यम से नशा विरोधी अभियान में जन भागीदारी बढ़ गई है। यह मंच नागरिकों को सीधे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो एनसीबी की 30 क्षेत्रीय इकाइयों से जोड़ता है।

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