Astrology : आपकी जन्म कुंडली बताएगी कि कब होगी आपकी इंगेजमेंट

Summary :

जन्म कुंडली से जानें आपकी सगाई का सही समय

जन्म कुंडली के माध्यम से विशेषज्ञ बता सकते हैं कि आपकी इंगेजमेंट कब होगी। ज्योतिषीय गणनाएं आपके जीवन के महत्वपूर्ण समय को उजागर करती हैं। कुंडली में ग्रहों की स्थिति और दशाएं आपके विवाह के समय को प्रभावित करती हैं।

प्रेम, सगाई, विवाह और दांपत्य जीवन एक सामाजिक संस्कार हैं। जब तक विवाह जैसा संस्कार जीवन में सम्पन्न नहीं होता है तब तक जीवन की पूर्णता नहीं होगी। भारतीय संस्कृति में विवाह को सोलह संस्कारों में से एक माना है। शायद यही कारण है विवाह जैसे प्रश्न हमेशा व्यक्ति की प्राथमिकता में रहते हैं। जहां तक मेरा विचार है कि धन के बाद प्रेम, सगाई और विवाह से संबंधित सवाल सबसे अधिक पूछे जाते हैं। मुझे भी जो प्रश्न किए जाते हैं उनमें धन के बारे में तो लोग जानने का इच्छुक रहते ही हैं साथ ही रिलेशनशिप, प्रेम, सगाई और वैवाहिक जीवन में बारे में भी लोग काफी उत्सुकता दिखाते देखे जाते हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि वैवाहिक जीवन में समस्याएं और सवाल बहुतेरे हैं।

ज्योतिष शास्त्र

सगाई में आने वाली समस्याएं

वैसे तो क्षेत्र विशेष और माहौल के आधार पर सगाई की समस्याएं कुछ हद तक भिन्न-भिन्न हो सकती हैं। लेकिन कुछ बाते कॉमन होती हैं। जिनके बारे में मैं यहां बताना उचित समझंूगा। आमतौर पर विवाह के संबंध में दो बातें सामने आती है। पहली तो यह कि सगाई के लिए रिश्ते तो बराबर आ रहें हैं लेकिन दुर्भाग्य से सगाई हो नहीं रही है। दूसरी बात यह है कि सगाई के लिए कोई भी प्रस्ताव नहीं आ रहा है। यहां यह ध्यान में रखें कि दोनों बातें अलग-अलग हैं। और इनको ध्यान में रखते हुए ही हमें समस्या को समझना चाहिए। और उसी के अनुसार ही उपाय भी सुझाने चाहिए। क्योंकि कि दोनों समस्याओं के उपाय भी अलग अलग होता है। इसलिए मैं पहले इस संबंध में क्लीयर होता हूं। और उसके बाद ही किसी प्रकार के समाधान की बात होती है। पहले पाठक यह समझें कि इंगेजमेन्ट के संकेत हाथों या कुंडली में हमें कहां से प्राप्त होते हैं। क्योंकि इस संबंध में काफी कुछ भ्रांतियां फैली हुई है।

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सगाई या विवाह के सूत्र हाथों और कुंडली में कहां होते हैं

वैसे तो हाथों की रेखाओं में कोई ऐसा निश्चित स्थान या रेखा नहीं है जिसके आधार पर विवाह के बारे में कोई सटीक भविष्यवाणी की जा सके। हालांकि पश्चिम के विद्वानों ने खासकर कीरो ने बुध के पर्वत की रेखाओं को विवाह रेखा माना है। हालांकि इनके आधार पर हम कोई ठीक-ठीक भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं। मेरा अनुभव कहता है कि हस्तरेखाओं में सामाजिक विवाह के संबंध में मस्तिष्क रेखा को देखना चाहिएं। क्योंकि कि मस्तिष्क रेखा से उठने वाली रेखाएं विवाह की औसत आयु के बारे में बताती है। लेकिन विवाह के बाद क्या होगा। कैसा होगा वैवाहिक जीवन। इसके संकेत हमें बृहस्पति के पर्वत और हृदय रेखा से मिलते हैं। लेकिन जब हमें विवाह की दिशा के बारे में जानना हो तो हमें किसी भी जातक की जन्म कुंडली को देखना चाहिए। यहां से हमें इस संबंध में ज्यादा सटीक सूत्र मिल सकते हैं। वैसे भी किसी की कुंडली के सातवें भाव से हमें विवाह संबंधी बहुत सी जानकारियां आसानी से मिल सकती हैं। इसके अलावा लड़की की कुंडली में बृहस्पति और पुरुष की कुंडली में शुक्र की स्थिति का अवलोकन भी किया जाना चाहिये। लेकिन इस तरह से फलित कहने से पूर्व सूत्रों को समझना जरूरी है। अन्यथा अर्थ का अनर्थ हो सकता है।

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वास्तु भी काफी कुछ बताता है

वास्तु की नजर से देखा जाए तो घर के बहुत से स्थानों से हमें संकेत मिलते हैं कि समस्या कहाँ पर है। जैसे घर का मुख्य द्वार यदि गलत जगह पर है तो ऐसे घर में प्रवेश के साथ ही लोगों की मानसिकता बदल जाती है। इसके अलावा अवसरों को देने का काम अग्नि कोण करता है। यदि वह ठीक नहीं है तो सगाई वाले आयेंगे ही नहीं। विवाह होना तो दूर की बात है। यदि घर में पिछले 10-15 वर्षों से कोई मांगलिक कार्य नहीं हुआ है तो इसका मतलब है कि भूमि में कोई दोष है। इसके लिए भूमि की जांच करवाना चाहिए। जब कंफर्म हो जाए कि भूमि में दोष है तो भूमि को जागृत करने के लिए घर में कोई मांगलिक कार्य आयोज्य करें।

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कब होगी इंगेजमेन्ट

जैसा कि मैंने बताया है कि हाथों में मस्तिष्क रेखा पर विवाह की उम्र के संकेत प्राप्त होते हैं। इसके अलावा भाग्य रेखा और वंश रेखा से भी सगाई या विवाह की आयु पता चलती है। जब कुंडली की बात हो तो किसी लड़की की कुंडली में चतुर्थेश की महादशा या अन्तरदशा में विवाह का योग बन सकता है। इसी प्रकार से किसी लड़के की कुंडली में अष्टमेश की दशा या अन्तरदशा में विवाह की संभावना अधिक होती है। जब गोचर की बात की जाए तो हमेशा शनि और बृहस्पति का गोचर देखना चाहिए। गोचर का बृहस्पति जब सप्तम भाव, सप्तमेश या शुक्र को देखे तो इंगेजमेंट की संभावना अधिक होती है। इसी प्रकार से जब शनि लग्न या चन्द्रमा से तीसरा, छठा या ग्यारहवां आये तो वह विवाह का योग बनाता है।

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Team Desk