विश्व वड़ा पाव दिवस पर अश्विनी वैष्णव ने शेयर किया मुंबई का पसंदीदा स्नैक

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नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। विश्व वड़ा पाव दिवस के अवसर पर केंद्रीय रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुंबई के सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड वड़ा पाव को समर्पित एक विशेष सोशल मीडिया पोस्ट साझा की। अश्विनी वैष्णव की पोस्ट में मुंबई की ऐतिहासिक पहचान छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) की पृष्ठभूमि में वड़ा पाव को दिखाया गया है। इस तस्वीर में मुंबई की रोजमर्रा की जिंदगी, उसकी पहचान और शहर की खास संस्कृति की झलक दिखाई देती है। केंद्रीय मंत्री ने अपनी पोस्ट के जरिए विश्व वड़ा पाव दिवस की शुभकामनाएं देते…

नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। विश्व वड़ा पाव दिवस के अवसर पर केंद्रीय रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुंबई के सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड वड़ा पाव को समर्पित एक विशेष सोशल मीडिया पोस्ट साझा की।

अश्विनी वैष्णव की पोस्ट में मुंबई की ऐतिहासिक पहचान छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) की पृष्ठभूमि में वड़ा पाव को दिखाया गया है। इस तस्वीर में मुंबई की रोजमर्रा की जिंदगी, उसकी पहचान और शहर की खास संस्कृति की झलक दिखाई देती है।

केंद्रीय मंत्री ने अपनी पोस्ट के जरिए विश्व वड़ा पाव दिवस की शुभकामनाएं देते हुए मुंबई के इस प्रतिष्ठित स्ट्रीट फूड का जश्न मनाया। पोस्ट में मुंबई के दो सबसे बड़े प्रतीकों- वड़ा पाव और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस को एक ही फ्रेम में दिखाया गया है।

यह पोस्ट सिर्फ एक लोकप्रिय व्यंजन का उत्सव नहीं, बल्कि मुंबई की पहचान और जीवनशैली का भी प्रतीक है। वड़ा पाव शहर की रोजमर्रा की संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है और इसे हर दिन लाखों लोग मुंबई समेत देश के विभिन्न हिस्सों में पसंद से खाते हैं।

विश्व वड़ा पाव दिवस के मौके पर केंद्रीय मंत्री की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर मुंबई की खास पहचान और उसके मशहूर स्ट्रीट फूड को समर्पित एक विशेष पोस्ट के रूप में देखी जा रही है।

आपको बता दें कि मुंबई की पहचान लोकल ट्रेन और गेटवे ऑफ इंडिया से ही नहीं, बल्कि उसके स्ट्रीट फूड वड़ा पाव से भी होती है। जिसे कभी गरीबों का बर्गर कहा जाता था, आज वही वड़ा पाव मुंबई की सांस्कृतिक पहचान बनकर वैश्विक मंच पर छा गया है।

वड़ा पाव की शुरुआत 1966 में दादर के अशोक वैद्य ने की थी। उस समय मिल मजदूरों के लिए यह एक सस्ता और जल्दी पेट भरने वाला विकल्प था। आज उसी वड़ा पाव का बाजार करोड़ों का हो चुका है।

–आईएएनएस

डीएससी

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IANS Agency

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