राष्ट्रपति के भाषण पर विरोध को लेकर रिजिजू का बयान, कहा- जिम्मेदार सांसद ऐसा व्यवहार नहीं करते

Summary :

नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संसद के दोनों सदनों को संबोधित करने के दौरान विपक्ष के व्यवहार को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से विपक्षी सदस्यों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के समय हंगामा किया, वह पूरे देश के लिए शर्मनाक है और जनता इसे कभी माफ नहीं करेगी। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में कहा, “आज जब राष्ट्रपति दोनों सदनों को संबोधित कर रही थीं, उस समय विपक्ष के सदस्यों का आचरण देश को शर्मिंदा करने वाला था। देश कभी भी विपक्षी दलों, कांग्रेस पार्टी…

नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संसद के दोनों सदनों को संबोधित करने के दौरान विपक्ष के व्यवहार को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से विपक्षी सदस्यों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के समय हंगामा किया, वह पूरे देश के लिए शर्मनाक है और जनता इसे कभी माफ नहीं करेगी।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में कहा, “आज जब राष्ट्रपति दोनों सदनों को संबोधित कर रही थीं, उस समय विपक्ष के सदस्यों का आचरण देश को शर्मिंदा करने वाला था। देश कभी भी विपक्षी दलों, कांग्रेस पार्टी और उनके सहयोगियों को इसके लिए माफ नहीं करेगा। सोचिए, क्या कोई जिम्मेदार सांसद इस तरह का व्यवहार कर सकता है?”

रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक विषयों का उल्लेख किया जा रहा था, लेकिन उसी समय विपक्ष के सदस्यों ने शोर-शराबा और हंगामा किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के 150वें वर्ष और महान साहित्यकार ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि दिए जाने के दौरान भी विपक्ष के लोग शांति बनाए रखने के बजाय विरोध और नारेबाजी कर रहे थे।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में गुरु तेग बहादुर के 350वें बलिदान दिवस का भी जिक्र किया गया। उन्होंने कहा कि यह अवसर पूरे देश के लिए उनके त्याग और बलिदान को याद करने और उससे प्रेरणा लेने का था। राष्ट्रपति ने देशवासियों से गुरु तेग बहादुर के बलिदान को याद रखने और उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया, लेकिन उसी समय विपक्ष के सदस्य हंगामा करते रहे।

रिजिजू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजनीति के मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं और बहस और विरोध भी लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रपति के संबोधन जैसे गरिमापूर्ण और राष्ट्रीय महत्व के अवसर पर इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। बाकी मामलों में राजनीति हो सकती है, लेकिन आज जो किया गया, वह राजनीति से ऊपर है। यह देश के सम्मान से जुड़ा मामला है और देश इसे कभी माफ नहीं करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष से आत्ममंथन करने की अपील करते हुए कहा कि संसद देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और वहां हर सांसद की जिम्मेदारी है कि वह गरिमा और मर्यादा बनाए रखे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे देश की आवाज होता है और ऐसे समय में सभी दलों को एकजुट होकर सम्मान दिखाना चाहिए।

–आईएएनएस

वीकेयू/एएस

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.