20वीं शताब्दी के अंत तक देश में केवल एक एम्स था, लेकिन आज संख्या बढ़कर 23 हो गई: जेपी नड्डा

नई दिल्ली, 9 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने गुरुवार को हैदराबाद के बीबीनगर में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान एम्स बीबीनगर की प्रगति की समीक्षा की। एम्स की स्थापना भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के सातवें चरण के तहत वर्ष 2019 में की गई थी। यह परियोजना जून 2022 में 1,110.55 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुई थी।

सभा को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र ने बुनियादी ढांचे और क्षमता विस्तार के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने बताया कि 20वीं शताब्दी के अंत तक देश में केवल एक एम्स था, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में छह अतिरिक्त एम्स स्थापित किए गए। तब से अब तक 16 नए एम्स जुड़ चुके हैं, जिससे देश भर में इनकी कुल संख्या 23 हो गई है। इनमें से 18 एम्स पहले से ही कार्यरत हैं, जबकि शेष विभिन्न चरणों में निर्माणाधीन हैं।

नड्डा ने कहा कि सरकार ने तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करते हुए द्वितीयक और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और सुदृढ़ीकरण करके एक समान और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा ढांचा विकसित किया है। उन्होंने बताया कि देश में अब 1.85 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं जो लगभग 1.5 अरब लोगों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2014 में 387 से बढ़कर वर्तमान में 820 हो गई है।

संस्थान के विभिन्न पहलुओं पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें अवसंरचना विकास, चिकित्सा शिक्षा, रोगी देखभाल, अनुसंधान गतिविधियां और संस्थान के सामने आने वाली चुनौतियां शामिल थीं।

एम्स बीबीनगर में वर्तमान में 132 संकाय सदस्य और 133 वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर हैं। संस्थान की स्थापना के तुरंत बाद एमबीबीएस कार्यक्रम शुरू हुआ और दो बैच पाठ्यक्रम पूरा कर चुके हैं। स्नातकोत्तर कार्यक्रम 24 एमडी विषयों और पांच डीएम/एमसीएच विशिष्टताओं में संचालित किए जा रहे हैं। 60 सीटों की क्षमता वाला बीएससी नर्सिंग कार्यक्रम 2024 में शुरू हुआ, जबकि एमएससी नर्सिंग पांच विशिष्टताओं में उपलब्ध है। संबद्ध स्वास्थ्य पाठ्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में संस्थान में 902 छात्र हैं और एमबीबीएस छात्रों का एक नया बैच जल्द ही शामिल होने वाला है।

संस्थान सभी प्रमुख विशिष्टताओं में बाह्य रोगी सेवाएं प्रदान कर रहा है और वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1,800 रोगियों का इलाज कर रहा है। इसमें भर्ती रोगियों के लिए 250 बिस्तर हैं और आपातकालीन सेवाएं हाल ही में शुरू की गई हैं। सीटी, एमआरआई और डेक्सा सहित अधिकांश प्रयोगशाला जांच और रेडियोलॉजिकल निदान सुविधाएं उपलब्ध हैं। संस्थान तेलंगाना के सभी 33 जिलों में ई-संजीवनी के माध्यम से टेलीकंसल्टेशन सेवाएं भी प्रदान करता है और पीएमजेएवाई-आरोग्यश्री योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। लगभग 90 प्रतिशत रोगी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत पंजीकृत हैं।

अनुसंधान के क्षेत्र में, एम्स बिबिनगर ने 129 परियोजनाओं के माध्यम से 64 करोड़ रुपए के अनुसंधान अनुदान प्राप्त किए हैं और 1,156 शोध प्रकाशन प्रकाशित किए हैं। संस्थान कार्बन-युक्त कृत्रिम पैर के अंग ‘एडीडीओसी’ के निर्माण में डीआरडीओ के साथ सहयोग भी कर रहा है।

नड्डा ने एम्स बीबीनगर की सामुदायिक सेवा पहलों की सराहना करते हुए बताया कि संस्थान ने छह गांवों को गोद लिया है और 547 मोबाइल मेडिकल कैंप आयोजित किए हैं। उन्होंने आगे कहा, “संस्थान अपने ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (आरएचटीसी) और शहरी स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (यूएचटीसी) के माध्यम से आसपास के समुदायों की सेवा भी करता है, जिससे अब तक 66,148 मरीजों को लाभ मिला है। लगभग 10 किलोमीटर की पहुंच वाला एक सामुदायिक रेडियो स्टेशन भी शुरू किया गया है और इसके माध्यम से 43 शैक्षिक कार्यक्रम प्रसारित किए गए हैं।”

निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि लगभग 902 करोड़ रुपए की लागत से चल रहे निर्माण कार्य का लगभग 87.4 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अस्पताल के सी और एफ ब्लॉक, आयुष भवन, अमृत निवास, शैक्षणिक ब्लॉक, और स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रावास भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि पुराने भवनों का जीर्णोद्धार कार्य वर्तमान में जारी है। रेडियोथेरेपी और ऑपरेशन थिएटर परिसर के शीघ्र ही पूरा होने की उम्मीद है।

समीक्षा के दौरान जेपी नड्डा ने परिसर में गैर-नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा अवसंरचना का विकास एक समय लेने वाली प्रक्रिया है और इसके लिए धैर्य की आवश्यकता होती है। मानव संसाधन को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने अधिक वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों की भर्ती और उन्हें बेहतर अवसर प्रदान करने के महत्व पर प्रकाश डाला। संकाय सदस्यों की कमी को दूर करने के लिए, उन्होंने सुझाव दिया कि स्थायी चयन समिति की बैठकें वर्ष में कम से कम चार बार आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने अन्य एम्स संस्थानों के साथ आदान-प्रदान कार्यक्रमों के साथ-साथ अतिथि संकाय सदस्यों की नियुक्ति का भी सुझाव दिया।

समीक्षा बैठक के बाद जेपी नड्डा ने संस्थान की विभिन्न सुविधाओं का दौरा किया, जिनमें भर्ती वार्ड, कार्डियोलॉजी विभाग में बन रही कैथ लैब और रेडियोलॉजी विभाग में ट्यूमर एब्लेशन और बायोप्सी के लिए रोबोटिक नेविगेशन सिस्टम शामिल हैं। उन्होंने आयुष ब्लॉक का भी दौरा किया, जिसमें टीकाकरण केंद्र, योग केंद्र और सामुदायिक रेडियो स्टेशन शामिल हैं। वहां उन्होंने संक्षिप्त संदेश दिया और संस्थान के प्रयासों की सराहना की। इसके बाद मंत्री ने परिसर का दौरा कर चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा की और अस्पताल के बुनियादी ढांचे की समग्र जानकारी प्राप्त की।

एम्स बीबीनगर चिकित्सा शिक्षा, रोगी देखभाल और अनुसंधान में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में लगातार काम कर रहा है, साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा में अपने योगदान को भी मजबूत कर रहा है।

–आईएएनएस

एमएस/

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