नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। सनातन धर्म में पंचांग का बेहद महत्व है। इस पांच अंगो (तिथि, वार, करण, योग व नक्षत्र) के आधार पर ही दिन की शुरुआत व शुभ-अशुभ समय का निर्धारण होता है। 3 मई (रविवार) को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी। इस दिन अभिजित मुहूर्त के साथ त्रिपुष्कर योग बन रहा है, जो शुभ कार्यों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है।
रविवार को सूर्योदय 5 बजकर 39 मिनट पर होगा व सूर्यास्त शाम 6 बजकर 57 मिनट पर होगा। चंद्रोदय शाम 8 बजकर 47 मिनट पर व चंद्रास्त अगले दिन यानी 4 मई की सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर होगा। तिथि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि 3 मई की देर रात 3 बजकर 1 मिनट तक रहेगी, उसके बाद तृतीया शुरू हो जाएगी। नक्षत्र विशाखा सुबह 7 बजकर 10 मिनट तक, उसके बाद अनुराधा नक्षत्र लग जाएगी। योग वरीयान् रात 10 बजकर 28 मिनट तक व करण तैतिल दोपहर 1 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।
रविवार के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 13 मिनट से 4 बजकर 56 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक इसमें त्रिपुष्कर योग भी सक्रिय रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 31 मिनट से 3 बजकर 25 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 56 मिनट से 7 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। वहीं, अमृत काल रात 10 बजकर 21 मिनट से देर रात 12 बजकर 8 मिनट (4 मई) तक रहेगा।
साथ ही निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। वहीं, त्रिपुष्कर योग 3 मई को सुबह 5 बजकर 39 मिनट से सुबह 7 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। इस योग में किए गए शुभ कार्य त्रिगुण फल देने वाले माने जाते हैं।
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल शाम 5 बजकर 18 मिनट से 6 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई नया काम शुरू न करें। यमगण्ड दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक, गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से 5 बजकर 18 मिनट तक, दुर्मुहूर्त शाम 5 बजकर 11 मिनट से 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगा।
–आईएएनएस
एमटी/एएस
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