नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
9 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 9:36 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। शुक्रवार सुबह 6:25 बजे सूर्योदय और शाम 6:03 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, तड़के 4:55 चंद्रोदय और शाम 5:11 बजे चंद्रास्त होगा।
पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य के हस्त नक्षत्र में प्रवेश करने से सभी 12 राशियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा का सूर्य से मित्रता का संबंध माना गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हस्त नक्षत्र 13वां नक्षत्र है, जिसका अर्थ ‘हाथ’ होता है। इस नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है।
शुक्रवार को रात 11:19 बजे तक ब्रह्म योग रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के पंचांग में ब्रह्म योग को 27 नित्य योगों में से 25वां और अत्यंत शुभ योग माना गया है। यह योग ज्ञान, बुद्धि, सात्विकता और देवत्व का प्रतीक है। इस योग के स्वामी अश्विनी कुमार हैं। इस योग में जन्मे लोग बुद्धिमान, गंभीर, सत्यवादी, शांत और परोपकारी स्वभाव के होते हैं।
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है। आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है।
शुक्रवार को दोपहर 2:07 से 3:43 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ, और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
इस दिन राहुकाल सुबह 10:46 बजे से 12:14 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है। स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है। इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है।
शुक्रवार को गुलिक काल सुबह 7:52 से 9:19 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को ‘विषैला समय’ भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उनको जारी रखा जा सकता है। जो काम बार-बार करना चाहते हैं तो इस काल में किया जा सकता है। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है।
इस दिन यमगंड काल दोपहर 3:08 से 4:35 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए।
शुक्रवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष रूप से पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है।
इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में गोचर रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा के कन्या राशि में होने (या जन्म कुंडली में कन्या राशि का चंद्रमा होने) का अर्थ है कि व्यक्ति का मन और भावनाएं विश्लेषणात्मक, व्यवस्थित और संवेदनशील स्वभाव की होती हैं। कन्या राशि के स्वामी बुध हैं, जो चंद्रमा के मित्र हैं, इसलिए इस स्थिति का प्रभाव व्यक्ति के जीवन और स्वभाव पर विशेष रूप से पड़ता है।
शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस अशुभ दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।
–आईएएनएस
एसडी/एबीएम
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