अब धार्मिक स्थलों की पहचान बताएगा बारकोड, इतिहास और मान्यताओं से सीधे जुड़ेंगे पर्यटक-श्रद्धालु

Summary :

लखनऊ, 15 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर पहुंचने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अब वहां के इतिहास, पुरातात्विक महत्व और धार्मिक मान्यताओं की जानकारी के लिए गाइड या स्थानीय लोगों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने धार्मिक स्थलों पर शिलालेख के साथ बारकोड की व्यवस्था शुरू की है, जिसे स्कैन करते ही संबंधित स्थल की महत्वपूर्ण जानकारी पर्यटकों और श्रद्धालुओं को उपलब्ध हो सकेगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत 575 परियोजनाओं के तहत अब तक 14 आस्था स्थलों पर शिलालेख और बारकोड लगाने का काम पूरा हो चुका है। प्रदेश के पर्यटन एवं…

लखनऊ, 15 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर पहुंचने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अब वहां के इतिहास, पुरातात्विक महत्व और धार्मिक मान्यताओं की जानकारी के लिए गाइड या स्थानीय लोगों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने धार्मिक स्थलों पर शिलालेख के साथ बारकोड की व्यवस्था शुरू की है, जिसे स्कैन करते ही संबंधित स्थल की महत्वपूर्ण जानकारी पर्यटकों और श्रद्धालुओं को उपलब्ध हो सकेगी।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत 575 परियोजनाओं के तहत अब तक 14 आस्था स्थलों पर शिलालेख और बारकोड लगाने का काम पूरा हो चुका है। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि धार्मिक, प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों के बारे में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को प्रमाणिक एवं संक्षिप्त जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की जा रही है।

उन्होंने कहा कि शिलालेखों पर संबंधित स्थल के पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक महत्व के साथ उसकी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी आवश्यक जानकारी दर्ज की जा रही है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों की पहचान दर्ज करना नहीं, बल्कि उन्हें जानकारी और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करना भी है। किसी प्राचीन मंदिर, आश्रम या धार्मिक स्थल पर पहुंचने वाला व्यक्ति वहां लगे बारकोड को स्कैन कर उस स्थान से जुड़े इतिहास, महत्व और मान्यताओं को आसानी से जान सकेगा। इससे नई पीढ़ी को भी स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में मदद मिलेगी।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 575 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन परियोजनाओं में शिलालेख और बारकोड की व्यवस्था का प्राविधान किया गया है। इनमें से 14 आस्था स्थलों पर यह कार्य पूरा हो चुका है, जबकि अन्य स्थलों पर भी बारकोडयुक्त शिलालेख लगाने की प्रक्रिया कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से आगे बढ़ाई जा रही है। जिन प्रमुख स्थलों पर शिलालेख एवं बारकोड लगाने का कार्य पूरा हो चुका है, उनमें नार्दानंद ऋषि आश्रम, मैनपुरी; सामौर बाबाधाम, फिरोजाबाद; वनखंडेश्वर मंदिर उखरैंड; च्यवन ऋषि आश्रम, मैनपुरी; राधाकृष्णन मंदिर, फिरोजाबाद; कल्याणी माता मंदिर, प्रयागराज; श्री दुर्वासा आश्रम, प्रयागराज; शूलकंटेश्वर महादेव मंदिर, प्रयागराज और श्री दशाश्वमेध मंदिर, प्रयागराज शामिल हैं।

इसके अलावा पगलानंद आश्रम, प्रयागराज; कमन्हिया बाबा मंदिर, अयोध्या; प्राचीन शिवाला मंदिर, अयोध्या; प्राचीन ज्वालादेवी मंदिर, सुचितागंज-सोहावल, अयोध्या तथा गहनाग बाबा मंदिर, अयोध्या में भी शिलालेख और बारकोड का कार्य पूरा किया जा चुका है। सरकार का मानना है कि धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर इस तरह की सूचना व्यवस्था से श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ प्रदेश में धार्मिक एवं विरासत पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

खासतौर पर ऐसे छोटे और अपेक्षाकृत कम चर्चित स्थलों को इससे नई पहचान मिल सकती है, जिनका स्थानीय इतिहास और धार्मिक महत्व तो है, लेकिन उनकी जानकारी व्यापक स्तर पर लोगों तक नहीं पहुंच पाती। इस व्यवस्था के जरिए उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल जानकारी से जोड़ने की दिशा में भी कदम बढ़ाया जा रहा है। आने वाले समय में अन्य परियोजनाओं के पूरा होने के साथ प्रदेश के और अधिक धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल इस सुविधा से जुड़ेंगे।

–आईएएनएस

विकेटी/डीकेपी

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.