पुणे, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने शनिवार को उजनी बांध और इंदापुर इलाके में प्रस्तावित एआई डेटा सेंटर समेत अन्य परियोजनाओं के खिलाफ सरकार को तीव्र आंदोलन की चेतावनी दी। हालांकि अधिकारियों की ओर से जनसुनवाई से पहले कोई काम शुरू नहीं करने का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने कुछ ही घंटों में आंदोलन वापस ले लिया।
रोहित पवार ने साफ कहा कि स्थानीय लोगों और किसानों को विश्वास में लिए बिना इन परियोजनाओं पर काम नहीं होने दिया जाएगा।
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों और स्थानीय नागरिकों को विश्वास में लिए बिना इन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि संबंधित समझौता ज्ञापन (एमओयू) में चार परियोजनाओं का उल्लेख है। इनमें एआई डेटा सेंटर, परमाणु ऊर्जा संयंत्र, पानी पर तैरने वाला सौर ऊर्जा प्रकल्प और हाइड्रोजन परियोजना शामिल है।
पवार ने कहा कि आंदोलन के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि जब तक स्थानीय नागरिकों और तीनों जिलों के लोगों को विश्वास में नहीं लिया जाता, तब तक परियोजनाओं का काम शुरू नहीं होना चाहिए। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जनसुनवाई होने तक एक प्रतिशत काम भी शुरू नहीं किया जाएगा और परियोजना का भूमिपूजन भी नहीं होगा। इस आश्वासन के बाद किसानों और स्थानीय नागरिकों से चर्चा कर आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया गया। उन्होंने पुलिस से आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की अपील भी की।
परियोजनाओं के बारे में गलत जानकारी दिए जाने के सवाल पर पवार ने कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी पालकमंत्री या अन्य लोगों के कहने पर जनता के बीच गलत जानकारी फैला रहे थे।
रोहित पवार ने कहा कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने एमओयू पढ़कर सुनाया। इसमें चारों परियोजनाओं का उल्लेख होने की बात सामने आई। उन्होंने दावा किया कि इससे परियोजनाओं को लेकर दी जा रही जानकारी पर सवाल खड़े हुए हैं।
परियोजनाओं को लागू करने वाली कंपनी के कुछ अधिकारियों की वरिष्ठ नेता शरद पवार से मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बारे में पूछे जाने पर रोहित पवार ने कहा कि उनसे कोई भी व्यक्ति या कारोबारी मिल सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि शरद पवार स्थानीय लोगों, किसानों, मछुआरों और वारकरी समुदाय के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।
पवार ने कहा, “हमें विश्वास है कि शरद पवार यहां के भूमिपुत्रों, किसानों, मछुआरों और वारकरी समुदाय के साथ 100 प्रतिशत खड़े रहेंगे। उनके मार्गदर्शन में ही हमने यह आंदोलन किया है।”
एमओयू में शामिल किसी परियोजना को रद्द किए जाने के सवाल पर रोहित पवार ने कहा कि इस बारे में फैसला सरकार को लेना है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए बिना काम शुरू करने की कोशिश की, तो उसे तीव्र आंदोलन का सामना करना पड़ेगा।
पवार ने कहा कि शनिवार के आंदोलन में लोगों को बहुत कम समय में जानकारी दी गई थी, इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अपने खर्च पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में स्थानीय लोग एकजुट होकर आंदोलन करने का फैसला करते हैं, तो चार से पांच लाख लोग भी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर सकते हैं।
–आईएएनएस
एएसएच/वीसी
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