Rahul Gandhi journalist assault case : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ तीन महीने की गर्भवती महिला पत्रकार की एक गंभीर अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। सर्वोच्च अदालत इस मामले पर 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।
यह विवाद 12 अक्टूबर का है जब इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था। यह मार्च चुनाव आयोग की कथित अनियमितताओं के खिलाफ और SIR रद्द किए जाने के लिए निकाली गई थी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतर रिपोर्टिंग कर रही पत्रकार ऋचा पराशर का आरोप है कि राहुल गांधी और उनके सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की की, जिसके कारण वह सीढ़ियों पर गिर गईं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने अर्जी पर जल्द सुनवाई की मांग रखी थी।
क्या है आरोप
घटना का विवरण देते हुए पत्रकार ऋचा पराशर ने बताया कि वह मौके पर विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं। उन्होंने दावा किया, “मेरे वीडियो में साफ दिख रहा है कि राहुल गांधी आगे बढ़े, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और खींचा। उसी सेकंड उनके गार्ड्स ने मुझे धक्का दे दिया।”
ऋचा के मुताबिक धक्का लगने के बाद वह सीढ़ियों पर पेट के बल गिर गईं और उनका फोन भी टूट गया। उन्होंने बताया कि कॉलर पर माइक लगे होने के कारण घटना का पूरा ऑडियो रिकॉर्ड हो गया। गिरने के बाद जब उन्होंने अपने कॉलर माइक के गिरने की बात कही, तो उन्हें चुप कराने की कोशिश की गई।
दबाई गई आवाज – रिचा
पत्रकार ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि भारी भीड़ के बीच उनका दम घुट रहा था। वह 3 महीने की गर्भावस्था में थीं और पेट के बल गिरने के कारण काफी घबरा गई थीं। उन्होंने कहा कि वहां मौजूद किसी भी व्यक्ति ने उनसे हाल-चाल तक नहीं पूछा, बल्कि उनकी आवाज दबाने के लिए नारेबाजी की गई।
सदमे की वजह से वह वहीं बैठकर रोने लगी थीं। इस अर्जी के सामने आने के बाद अब 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख रहता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
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