अगर आप इस वीकेंड परिवार के साथ कोई ऐसी फिल्म देखने का प्लान बना रहे हैं, जिसमें हंसी-मजाक के साथ मिस्ट्री और सुपरनैचुरल ट्विस्ट भी हों, तो यामी गौतम की फिल्म ‘नई नवेली’ आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है। इस फिल्म की खासियत इसकी देसी कहानी, भारतीय परंपराओं से जुड़ाव और हॉरर-कॉमेडी का कॉम्बीनेशन है। यह कहानी एक नई बहू के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके घर में कदम रखते ही खुशियों के साथ मिस्टीरियस घटनाओं का सिलसिला शुरू हो जाता है। तो आइए जानते हैं कि कहानी, एक्टिंग, डायरोक्शन और म्यूज़िक के मामले में फिल्म कैसी है और क्या यह दर्शकों का समय और पैसा वसूल करने के लायक है या नहीं।
- फिल्म: नई नवेली
- कलाकार: यामी गौतम धर, आदिनाथ कोठारे, आदित्य कुलश्रेष्ठ, सुनीता राजवार, मीता वशिष्ठ
- डायरेक्टर: बालाजी मोहन
- ड्यूरेशन: 2 घंटा 18 मिनट
- रेटिंग: 2/5 स्टार
कहानी: नई बहू के आने से परिवार में शुरू होता है रहस्य

‘नई नवेली’ की कहानी मोहिनी (यामी गौतम) से शुरू होती है, जो शादी के बाद एक नए परिवार की बहू बनकर आती है। शुरुआत में सब कुछ सिंपल और खुशनुमा नजर आता है। अपने सिंपल बिहेवियर और मिलनसार स्वभाव से मोहिनी जल्द ही परिवार के सदस्यों का दिल जीत लेती है। हालांकि, कहानी में दिलचस्प मोड़ तब आता है, जब घर में कुछ अजीब घटनाएं होने लगती हैं। परिवार के एक सदस्य को मोहिनी की असली पहचान पर शक होने लगता है। उसे लगता है कि मोहिनी जितनी सिंपल दिखाई देती है, उसकी असलियत उतनी ही मिस्टीरियस हो सकती है।
इसके बाद फिल्म भारतीय लोककथाओं, पौराणिक मान्यताओं और अलौकिक शक्तियों की दुनिया में एंट्री करती है। ऐसे में ये फिल्म घरेलू रिश्तों और पारिवारिक माहौल के बीच पनपती मिस्टीरियस कहानी को एक अलग रंग देती है। फिल्म का यही देसी बैकग्राउंड इसे सिंपल हॉरर-कॉमेडी से अलग पहचान दिलाता है।
एक्टिंग: यामी गौतम ने निभाया दमदार किरदार
यामी गौतम (मोहिनी): यामी गौतम फिल्म की सबसे बड़ी कलाकार में से एक हैं। उन्होंने एक संस्कारी और मासूम दिखने वाली नई बहू के किरदार को सिपलीसिटी के साथ निभाया है। वहीं, मिस्टीरियस सीन्स में उनके चेहरे के इमोशन और बॉडी लैंग्वेज कहानी के सस्पेंस को बढ़ाते हैं। उनकी एक्टिंग में किरदार के अलग-अलग पहलुओं का अच्छा मेल भी दिखाई देता है।
आदिनाथ एम कोठारे: मोहिनी के पति के रोल में आदिनाथ कोठारे ने बैलेंस्ड एक्टिंग की है। उनका किरदार पत्नी के प्रति प्यार और परिवार के मन में उठ रहे शक के बीच उलझा नजर आता है। इस इमोशनल खींचतान को उन्होंने नेचुरल तरीके से पर्दे पर उतारा है।
वहीं सपोर्टिंग कास्ट में सुनीता राजवार, मीता वशिष्ठ, सुष्मिता मुखर्जी, अनुराग ठाकुर, प्रतीक पचौरी और सोनल झा सहित बाकी कलाकारों ने फिल्म को मजबूती दी है। खास तौर पर सुनीता राजवार और मीता वशिष्ठ की कॉमिक टाइमिंग कहानी के हल्के-फुल्के हिस्सों को एंटरटेनिंग बनाती है। वहीं हेल्पिंग कलाकारों की मौजूदगी से फिल्म का पारिवारिक माहौल भी इफेक्टिव बनता है।
निर्देशन: देसी अंदाज में हॉरर और कॉमेडी का मेल

आपको बता दें कि फिल्म का निर्देशन बालाजी मोहन ने किया है। वहीं दिव्या निधि शर्मा और हिमांशु शर्मा के साथ उन्होंने इसके स्क्रीनप्ले पर भी काम किया है। पारिवारिक ड्रामा, कॉमेडी और सुपरनैचुरल एलिमेंट को एक साथ पेश करना चैलेंजिंग है, लेकिन फिल्म कई जगहों पर इन जौनर के बीच अच्छा बैलेंस बनाने में सफल रहती है। पहला हाफ हल्के-फुल्के पलों और पारिवारिक घटनाओं पर बेस्ड है। इसके बाद दूसरे हाफ में मिस्ट्री और फैंटेसी का हिस्सा ज्यादा खास हो जाता है, जिससे कहानी की रफ्तार बढ़ती है।
हालांकि, बीच के कुछ हिस्सों में स्क्रीनप्ले धीमा पड़ता है और कुछ सीन जरूरत से ज्यादा खिंचे हुए महसूस होते हैं। इसके बावजूद फिल्म की भारतीय एन्वायरमेंट से जुड़ी कहानी और देसी प्रेजेंटेशन दर्शकों को बांधे रखने की कोशिश करती है।
म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर कैसा है?

फिल्म का म्यूज़िक इसकी कहानी और माहौल के हिसाब से है। इसमें भारतीय फोक म्यूज़िक के साथ मॉडर्न धुनों का इस्तेमाल किया गया है, जो फिल्म के कल्चरल बैकग्राउंड को उभारता है। बैकग्राउंड स्कोर मिस्टीरियस और सुपरनैचुरल सीन्स में तनाव पैदा करने में मदद करता है। वहीं, कॉमेडी वाले हिस्सों में हल्का म्यूज़िक माहौल को सिंपल बनाए रखता है। कुल मिलाकर, म्यूज़िक फिल्म के अलग-अलग मूड को उभारने में मददगार साबित होता है।
‘नई नवेली’ की कमजोरियां

फिल्म में खूबियां होने के बावजूद कुछ पहलू ऐसे हैं, जो इसके एक्सपीरिएंस को थोड़ा इफेक्ट करते हैं। जैसे धीमी रफ्तार: मिडल पार्ट में कहानी की स्पीड कम हो जाती है और कुछ सीन लंबे लगते हैं। प्रिडीक्ट करने लायक ट्विस्ट: सस्पेंस और हॉरर फिल्मों के नियमित दर्शक कुछ मिस्ट्री का अंदाजा पहले ही लगा सकते हैं।
आखरी फैसला: क्या ‘नई नवेली’ देखने लायक है?
‘नई नवेली’ भारतीय परंपराओं, पारिवारिक रिश्तों, रहस्य और कॉमेडी को एक साथ लाने की कोशिश करती है। यामी गौतम की एक्टिंग फिल्म की खास ताकत है, जबकि बालाजी मोहन का निर्देशन और सहायक कलाकारों की कॉमिक टाइमिंग कहानी को मनोरंजक बनाते हैं। हालांकि, धीमी स्क्रीनप्ले और कुछ अनुमान लगाने लायक ट्विस्ट इसकी कमजोरियां हैं। इसके बावजूद, अगर आपको हल्की-फुल्की हॉरर-कॉमेडी, भारतीय लोककथाओं और पारिवारिक एंटरटेंमेंट वाली फिल्में पसंद हैं, तो यह आपके वीकेंड के लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकती है।


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