आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर एएमसी का बड़ा कदम, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप व्यवस्थित प्रबंधन ढांचा तैयार

अहमदाबाद, 2 जून (आईएएनएस)। अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों के प्रबंधन के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए एक व्यवस्थित ढांचा लागू किया है। इसमें शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य केंद्रों, खेल परिसरों, बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों पर विशेष ध्यान दिया गया है, साथ ही आश्रयों की क्षमता से जुड़ी व्यावहारिक सीमाओं और पशु कल्याण नियमों के बीच संतुलन भी बनाए रखा गया है।

आईएएनएस से ​​बात करते हुए कैटल न्यूसेंस कंट्रोल डिपार्टमेंट (सीएनसीडी) के हेड ऑफ डिपार्टमेंट नरेश राजपूत ने पुष्टि की कि इन पांच कैटेगरी में आने वाली लगभग 1,050 जगहों की पहचान की गई है और उसके तहत उनका सर्वे किया गया है।

उन्होंने कहा कि इनमें शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य सुविधाएं, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बस डिपो और रेलवे स्टेशन शामिल हैं। ये सभी सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई ‘सार्वजनिक जगहों’ की कैटेगरी में आते हैं, जहां कुत्तों के प्रबंधन के लिए एहतियाती उपाय करना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार जिन्हें एएमसी ने लागू किया है। संस्थानों को बाड़ लगाकर, बाउंड्री को मजबूत करके, कचरे का सही तरीके से निपटान करके और निगरानी व नियमों के पालन के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करके आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकना होगा।

राजपूत ने बताया कि हर संस्थान के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस अधिकारी की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि परिसर में कुत्ते प्रवेश न करें और खाने के कचरे का सही तरीके से निपटान हो, ताकि आवारा कुत्ते उसकी ओर आकर्षित न हों।

उन्होंने कहा कि नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि बाहर से कोई कुत्ता अंदर न आए, सुरक्षा गार्डों को इस बारे में जागरूक किया जाए, और बाउंड्री की दीवारें सुरक्षित हों ताकि कुत्ते कूदकर अंदर न आ सकें।

संस्थानों को यह निर्देश भी दिया गया है कि वे कचरे के निपटान की उचित व्यवस्था करें और खाने का कचरा खुले में न फेंकें, क्योंकि ऐसा करने से आवारा कुत्ते एक जगह जमा हो जाते हैं।

एएमसी के अधिकारियों ने पुष्टि की कि समय-समय पर निरीक्षण किए जाते हैं। इन निरीक्षणों के दौरान, टीमें यह जांच करती हैं कि परिसर के अंदर नसबंदी किए हुए और बिना नसबंदी वाले कुत्ते मौजूद हैं या नहीं।

संस्थानों के इलाकों में पाए जाने वाले बिना नसबंदी वाले कुत्तों को पकड़कर नसबंदी के लिए भेज दिया जाता है, जबकि आक्रामक या काटने वाले कुत्तों को निगरानी और इलाज के लिए आश्रय-स्थलों में भेज दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि इस कैटेगरी-आधारित पहल के तहत अब तक ऐसे संस्थानों से लगभग 48 कुत्तों को हटाया जा चुका है।

संस्थानों के सर्वे में यह भी पता चला है कि पहचाने गए परिसरों में लगभग 5,000 से 5,500 आवारा कुत्ते फैले हुए हैं। औसतन हर परिसर में दो से तीन कुत्ते पाए गए हैं जबकि बड़े और खुले संस्थानों में इनकी संख्या ज्यादा हो सकती है। कुछ जगहों पर तो यह संख्या 10 तक भी पहुंच सकती है।

एएमसी ने स्पष्ट किया कि संस्थानों में पाए जाने वाले कुत्तों की यह आबादी, शहर में मौजूद आवारा कुत्तों की कुल आबादी का ही एक हिस्सा है। शहर में आवारा कुत्तों की कुल आबादी का अनुमान दो लाख से भी ज्यादा है। यह अनुमान सबसे पहले 2019 में किए गए पिछले सर्वे के आधार पर लगाया गया था।

इस समय चल रही वैज्ञानिक जनगणना का उद्देश्य जीपीएस सक्षम मोबाइल ऐप्स और वार्ड-वार मैपिंग का इस्तेमाल करके इन आंकड़ों को अपडेट करना है।

राजपूत ने बताया कि एएमसी के प्रयासों की एक सीमा है और वह सीमा है आश्रय-स्थलों में कुत्तों को रखने की क्षमता। वर्तमान में शहर के विभिन्न आश्रय-स्थलों में कुल मिलाकर लगभग 480 से 550 कुत्तों को रखने की क्षमता उपलब्ध है।

उन्होंने बताया कि विस्तार चक्र के अंत तक यह क्षमता बढ़कर लगभग 1,180 कुत्तों तक पहुंचने की उम्मीद है, क्योंकि नरोडा, वस्त्राल और लांभा में नए आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता लगभग 200 कुत्तों की होगी।

राजपूत ने कहा कि जहां एक ओर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने पर जोर देते हैं, वहीं दूसरी ओर इसका क्रियान्वयन परिचालन की व्यावहारिकता और ‘पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023’ के साथ संतुलित तरीके से किया जाता है। इन नियमों के तहत चिकित्सा प्रक्रियाओं के बाद कुत्तों का बंध्याकरण और फिर उन्हें नियंत्रित तरीके से वापस छोड़ने की आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा कि हम अपनी क्षमता की सीमाओं के भीतर ही काम करते हैं। सभी कुत्तों को हटाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, इसलिए हम काटने वाले और आक्रामक कुत्तों के मामलों को प्राथमिकता देते हैं।

एएमसी के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान में लगभग 84 आक्रामक कुत्तों को उनके व्यवहार के आकलन के लिए आश्रय स्थलों में रखा गया है।

नगर निगम ने ‘कुत्ता काटने की घटनाओं के प्रबंधन’ की एक प्रणाली भी लागू की है। जिसके तहत शिकायत मिलने पर एक टीम द्वारा मौके पर जाकर जांच की जाती है; इस टीम में एक पशु चिकित्सक, एक स्वच्छता निरीक्षक और एक पशु पकड़ने वाला कर्मचारी शामिल होता है।

यह टीम संबंधित कुत्ते की पहचान करती है और उसके टीकाकरण के इतिहास की जांच करती है और यह तय करती है कि उस जानवर को पकड़ने की आवश्यकता है या उसके इलाज की।

–आईएएनएस

डीकेएम/डीएससी

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