अयोध्या, 10 जुलाई (आईएएनएस)। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को दान की गई 200 चांदी की ईंटों को लेकर उठे विवाद के बीच, विश्व सिंधी सेवा संगम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के स्पष्टीकरण पर संतोष जताया है। संगठन ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि को पत्र भेजकर कहा है कि ट्रस्ट द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और स्पष्टीकरण से दानदाता पूरी तरह संतुष्ट हैं और उन्हें इस मामले में किसी अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता नहीं है।
यह पत्र ट्रस्ट की ओर से 1 जुलाई 2026 को भेजे गए उत्तर के संदर्भ में लिखा गया है। संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष लायन डॉ. राजू मनवानी ने अपने पत्र में कहा कि सिंधी समुदाय के 200 सदस्यों द्वारा दान की गई 200 चांदी की ईंटों के संबंध में ट्रस्ट ने विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई, जिसके लिए पूरा समुदाय आभार व्यक्त करता है।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सभी 200 दानदाताओं ने चांदी की ईंटों का भुगतान सीधे जौहरी को किया था और संबंधित जौहरी ने प्रत्येक दानदाता को भुगतान की रसीद भी जारी की थी। संगठन ने कहा कि ट्रस्ट के स्पष्टीकरण के बाद अब इस मामले में कोई भ्रम या शंका नहीं बची है।
विश्व सिंधी सेवा संगम ने ट्रस्ट के अनुरोध के अनुरूप सभी 200 दानदाताओं की सूची उनके संपर्क नंबरों सहित उपलब्ध कराई है। साथ ही, 35 भारतीय शहरों और 17 देशों का विवरण भी संलग्न किया गया है, जहां से इन दानदाताओं का प्रतिनिधित्व है।
संगठन ने ट्रस्ट से सितंबर या अक्टूबर 2026 के दौरान किसी उपयुक्त तिथि पर सामूहिक रूप से श्रीराम मंदिर के दर्शन की अनुमति देने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद समुदाय के अधिकांश सदस्यों को अब तक मंदिर में दर्शन का अवसर नहीं मिल सका है। ऐसे में सभी दानदाताओं की इच्छा है कि वे एक साथ अयोध्या पहुंचकर प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त करें।
डॉ. राजू मनवानी ने पत्र में ट्रस्ट के सहयोग और विस्तृत उत्तर के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।
बता दें कि हाल के दिनों में राम मंदिर को दान में दी गई 200 चांदी की ईंटों को लेकर कुछ दानदाताओं की ओर से गंभीर सवाल उठाए गए थे। इन आरोपों के बाद मामला चर्चा में आया था। हालांकि अब विश्व सिंधी सेवा संगम ने आधिकारिक रूप से ट्रस्ट के जवाब पर संतोष जताते हुए विवाद को समाप्त मानने का संकेत दिया है और अपना ध्यान आगामी सामूहिक राम मंदिर दर्शन की तैयारी पर केंद्रित किया है।
–आईएएनएस
एससीएच/पीएसके
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