नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय वायुसेना गुरुवार को अपनी स्थापना की 94वीं वर्षगांठ मना रही है। हिंडन एयरबेस पर आयोजित भव्य परेड समारोह में वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने कहा कि यह दिन केवल गौरवशाली इतिहास को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का भी समय है। उन्होंने वायु योद्धाओं से उस शपथ को याद करने का आह्वान किया, जो उन्होंने वायुसेना की वर्दी पहनते समय ली थी।
एपी सिंह ने पिछले वर्ष हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरी दुनिया ने भारतीय वायुसेना की तेजी से युद्ध अभियानों में उतरने की क्षमता देखी। इस अभियान के दौरान वायुसेना की प्रहार क्षमता और प्रभावी वायु रक्षा अभियानों को भी देखा गया। उन्होंने कहा कि वायुसेना का संकल्प और ताकत केवल शब्द नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक क्षमता का प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता भारतीय वायुसेना का मार्गदर्शक सिद्धांत है। तेजस हल्का लड़ाकू विमान, उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान, प्रशिक्षक विमान, ध्रुव और प्रचंड हेलीकॉप्टर, अस्त्र मिसाइल, आकाश वायु रक्षा प्रणाली और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे स्वदेशी प्रणालियां इसी संकल्प का परिणाम हैं।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि 1932 में केवल चार विकर्स विमानों के साथ शुरू हुई भारतीय वायुसेना आज एक सक्षम, नेटवर्क आधारित और बहुआयामी शक्ति के रूप में दुनिया की श्रेष्ठ वायु सेनाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि यह सफर दृढ़ संकल्प, साहस, नवाचार और सर्वोच्च बलिदानों से बना है। उन्होंने वायु योद्धाओं से वायुसेना के पूर्वजों और उन सभी वीरों तथा वीरांगनाओं को याद करने का आह्वान किया, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि इन स्मृतियों से देश के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को सही ढंग से निभाने की प्रेरणा मिलती है।
एपी सिंह ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ अनिश्चितता तथा जटिल भू-राजनीतिक चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। अलग-अलग हिस्सों में नए संघर्ष सामने आ रहे हैं। ऐसे घटनाक्रमों ने दिखाया है कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा में वायु शक्ति की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना वायु शक्ति की संरक्षक होने के नाते अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों को समझती है। वह हर परिस्थिति का सामना करने के लिए सतर्क, प्रतिबद्ध और तैयार है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि किसी भी वायुसेना के पास दुनिया के सबसे आधुनिक विमान और प्रणालियां हो सकती हैं, लेकिन उसकी वास्तविक ताकत उसकी परिचालन तैयारी से मापी जाती है। महत्वपूर्ण यह है कि जरूरत पड़ने पर वह कितनी तेजी और आत्मविश्वास के साथ कार्रवाई कर सकती है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि परिचालन क्षमता की मजबूत नींव पेशेवर प्रशिक्षण है। वायुसेना में प्रशिक्षण इस तरह किया जाता है कि युद्ध जैसी परिस्थितियों में वायु और जमीन पर तैनात कर्मियों का कौशल उनके स्वभाव का हिस्सा बन जाए। इसके लिए लगातार यथार्थपरक अभ्यास किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि चाहे देश के आकाश की रक्षा करनी हो, आपदा के समय राहत पहुंचानी हो या लक्षित कार्रवाई करनी हो, वायुसेना लगातार हर तरह के अभियान के लिए खुद को तैयार करती है। इसी दिशा में इस वर्ष वायु शक्ति, द्रोणाथॉन और बहुपक्षीय वायु अभ्यास तरंग शक्ति जैसे महत्वपूर्ण अभ्यास किए गए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य युद्धक तैयारी को परखना और नई तकनीकों को तेजी से परिचालन व्यवस्था में शामिल करना है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वायुसेना ड्रोन से लेकर हाइपरसोनिक वाहनों, आधुनिक विमानों और उपग्रहों तक नई तकनीकों को लगातार अपना रही है। दुनिया अब एआई, स्वायत्त प्रणालियों और डिजिटल नवाचार के दौर में प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना विशाल मात्रा में उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर कमांडरों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता देने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रही है। स्वायत्त प्रणालियां भी इस तरह विकसित की जा रही हैं, जिसमें मानव की भूमिका बनी रहे। उनका लक्ष्य ऐसी तकनीक-सक्षम वायुसेना तैयार करना है, जिसमें निर्णय और नियंत्रण का अधिकार मानव के पास रहे। वायुसेना को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार रखने के लिए उद्योग, नवोदित कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ भी लगातार सहयोग बढ़ाया जा रहा है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि आत्मनिर्भरता की इसी नींव पर उभरती तकनीकों को तेजी से अपनाना वायुसेना की प्राथमिकता बन गया है। उन्होंने अंतरिक्ष को वायु क्षेत्र का स्वाभाविक विस्तार बताते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और देश की अंतरिक्ष संस्थाओं के साथ बढ़ते सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने गगनयान अभियान में वायुसेना की भूमिका की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना केवल युद्धक क्षमता के लिए ही नहीं, बल्कि संकट के समय देश और मानवता की सेवा के लिए भी जानी जाती है। बाढ़, भीषण जंगल की आग और अन्य आपदाओं के दौरान वायु योद्धाओं ने लोगों की जान और संपत्ति बचाने के साथ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि भारत की मानवीय सहायता और आपदा राहत गतिविधियां देश की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इन अभियानों के जरिए वसुधैव कुटुंबकम की भावना को आगे बढ़ाया जा रहा है। वायुसेना प्रमुख ने तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते तालमेल को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय थलसेना और नौसेना के साथ संयुक्त योजना और एकीकृत युद्धक कार्रवाई वायुसेना के लिए कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह उसकी दैनिक गतिविधि का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं के बीच क्षमताओं और कर्मियों का आदान-प्रदान बढ़ रहा है। इससे आपसी समझ और साथ मिलकर काम करने की क्षमता मजबूत हो रही है। प्रत्येक सेवा अपनी अलग क्षमता लेकर आती है और जब ये क्षमताएं एक साथ आती हैं, तो देश के सैन्य उद्देश्यों को कहीं अधिक प्रभावी और एकीकृत तरीके से हासिल किया जा सकता है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और तैयारी सही दिशा में बढ़ रही है। साथ ही पूरी सेना में जिम्मेदारी लेने और अपने कार्यों के प्रति जवाबदेही की संस्कृति मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि उपकरण, तकनीक और मंच केवल साधन हैं। वायुसेना की वास्तविक ताकत उसके वायु योद्धाओं की क्षमता और कौशल में है। उन्होंने कहा कि वायुसेना अपने मूल मूल्यों का पालन करते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को लगातार तैयार कर रही है।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसके
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