चंडीगढ़, 22 अगस्त (आईएएनएस)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी के खिलाफ कथित रूप से रेप मामले को दबाने के लिए 5 करोड़ मांगने के आरोपों पर विपक्ष हमलावर है। विपक्ष ने मामले की सीबीआई जांच और मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आम आदमी पार्टी की महिला विरोधी राजनीतिक पर्दाफाश हुआ। दिनदहाड़े आम आदमी पार्टी का भ्रष्टाचार खुला। और तो और, पार्टी ने इसे दबाने की कोशिश भी की।”
प्रदीप भंडारी ने लिखा, “राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उन आरोपों का संज्ञान लिया है, जिनमें कहा गया है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी ने रेप के एक मामले को दबाने के लिए 5 करोड़ रुपए की मांग की थी। ये आरोप पंजाब के पूर्व जज जस्टिस रंजीत सिंह ने लगाए हैं। आयोग ने अब पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी को इस मामले की जांच करने और दो हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।”
भाजाप प्रवक्ता ने आगे लिखा, “आम आदमी पार्टी महिलाओं की आवाज दबाती है। महिलाओं के प्रति अरविंद केजरीवाल का रवैया शर्मनाक है।” प्रदीप भंडारी ने सवाल किया कि क्या अब आतिशी और आम आदमी पार्टी की दूसरी महिला नेता इस पर कुछ बोलेंगी?
वहीं, शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने भगवंत मान को ‘गुरु-द्रोही’ बताते हुए इस घटना पर जवाब मांगा। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “रेप पीड़िता उस पुलिस फोर्स से क्या न्याय की उम्मीद कर सकती है जो आपके (भगवंत मान) इशारों पर नाचती है?”
मजीठिया ने कहा, “भगवंत मान की पत्नी पर 5 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने आपके डीजीपी और मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। आरोप है कि आपकी पुलिस पीड़िता के बजाय आरोपी को बचाने में लगी है। आपके कहने पर, आरोपी को कथित तौर पर रेप के दो मामलों में जमानत मिल गई और उसे आजाद छोड़ दिया गया।”
अकाली नेता ने कहा, “अगर आपमें हिम्मत है, तो सच सामने लाएं। आपका ‘अस्थायी डीजीपी’ 5 करोड़ रुपए की मांग के आरोप की जांच नहीं कर सकता, क्योंकि आप खुद गृह मंत्री भी हैं। भगवंत मान को पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए तुरंत इस मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करनी चाहिए। भगवंत मान, आपकी पत्नी पर 5 करोड़ रुपए की मांग करने का गंभीर आरोप लगा है। नैतिक आधार पर आपने पंजाब के लोगों का भरोसा खो दिया है। तुरंत पंजाब के राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेजें।”
–आईएएनएस
डीसीएच/
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