नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। “कोई कहे, कहता रहे कितना भी हमको दीवाना, हम लोगों की ठोकर में है ये जमाना, जब साज है, आवाज है, फिर किसलिए हिचकिचाना।” यह वो आवाज थी जो बस दिल में उतर जाती थी। यह आवाज कॉलेज के गलियारों में गूंजती थी। यह आवाज कानों में ईयरफोन लगाकर सुनी गई पहली मोहब्बत की भी थी। बात हो रही है कि दिवंगत गायक केके की।
केके का पूरा नाम कृष्ण कुमार कुन्नथ था। 23 अगस्त 1968 को केके दिल्ली में जन्मे, लेकिन परिवार मलयाली था। केके ने सेंट मैरी स्कूल से स्कूल की पढ़ाई पूरी की और किरोड़ीमल कॉलेज से कॉमर्स में ग्रेजुएशन पूरी की। उन्होंने दो साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था और वे अपने कॉलेज के रॉक बैंड का हिस्सा भी थे। उन्हें यूटीवी के लिए सिंगर लेस्ली लुईस का एक मिनट का जिंगल गाने का मौका मिला, जिससे उनके करियर की शुरुआत हुई।
किशोर कुमार की गायकी और आरडी बर्मन का संगीत केके पर बड़ा गहरा असर डालता था, लेकिन बॉलीवुड में गायक बनना इतना आसान नहीं होता है। केके ने जिंगल्स बनाने शुरू किए। बॉलीवुड में आने से पहले केके ने अनेकों जिंगल्स बनाए। इसके बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया।
उनकी जिंदगी का एक किस्सा यह बताया जाता है कि ग्रेजुएशन के बाद छह-आठ महीने केके ने सेल्समैन की नौकरी भी की। यह नौकरी उन्होंने इसलिए की कि उन्हें शादी करनी थी। एक लड़की से उन्हें प्यार था और उसके परिवार को दिखाना था कि लड़का नौकरी करता है। हालांकि, छह-आठ महीने बाद केके समझ चुके थे कि उनकी नियति सेल्समैन बने रहना नहीं था। उनकी मंजिल कुछ और थी जिसको तलाशने के लिए केके ने खुद को आजमाना शुरू कर दिया।
1999 में जब भारतीय क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप खेलने जा रही थी, तब केके ने टीम के लिए ‘जोश ऑफ इंडिया’ गाना गाया। इस गाने ने टीम इंडिया में खूब जोश भरा। बिना किसी ट्रेनिंग और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बिना किसी गॉडफादर के, युवा केके ने 1990 के दशक की शुरुआत में म्यूजिक कंपोजरों के दरवाजे खटखटाना शुरू कर दिया था।
“तड़प तड़प के इस दिल से आह निकलती रही, मुझको सजा दी प्यार की, ऐसा क्या गुनाह किया, तो लुट गए हां लुट गए, तो लुट गए हम तेरी मोहब्बत में”
बॉलीवुड फिल्म के लिए गाने का उनका सपना तब सच हुआ, जब विशाल भारद्वाज ने उन्हें संपूर्ण सिंह गुलजार की फिल्म ‘माचिस’ (1996) में “छोड़ आए हम” गाना गाने के लिए कहा। लेकिन उन्हें बड़ी पहचान संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ (1999) के बेहद लोकप्रिय गाने “तड़प तड़प” से मिली।
केके की खासियत उनके गानों का ताजापन और जोश था। जहां बॉलीवुड एक के बाद एक रोमांटिक गाने बना रहा था, वहीं केके के शुरुआती हिट गाने दोस्ती और जिंदगी के उतार-चढ़ाव व पुरानी यादों के खट्टे-मीठे एहसास के बारे में थे।
चाहें “छोड़ आए हम वो गलियां, जहां तेरे पैरों के कंवल गिरा करते थे, हंसे तो दो गालों में भंवर पड़ा करते थे।” या “सच कह रहा है दीवाना दिल, दिल ना किसी से लगाना। झूठे हैं यार के वादे सारे, झूठी हैं प्यार की कस्में।” बॉलीवुड में केके की आवाज ने ऐसा जादू किया कि उनके पास लंबी फेहरिस्त बनती चली गई। वे लोगों के दिलों में भी बस चुके थे। केके की आवाज में एक अलग कशिश थी। उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, असमिया और गुजराती भाषाओं की फिल्मों में गाने रिकॉर्ड किए।
केके कोलकाता में लाइव परफॉर्म कर रहे थे, लेकिन स्टेज के इस कलाकार ने स्टेज पर ही आखिरी सांस ली। केके को उन लोगों के सामने हार्टअटैक आया, जो इस बेहतरीन गायक के फन के मुरीद थे। केके 53 साल की उम्र में 31 मई 2022 को इस दुनिया को छोड़कर चले गए। हालांकि, कलाकार कभी मरता नहीं है, केके अपनी हमेशा गूंजने वाली आवाज के जरिए श्रोताओं के दिलों में जिंदा हैं।
–आईएएनएस
डीसीएच/एएस
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)



Download Android App
Download iOS App



