पटना, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक खारिज होने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। एनडीए के नेता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच बिहार में एनडीए के नेताओं ने कहा कि विपक्ष महिला विरोधी पार्टी है और इसके पारित न होने पर खुशी मना रही है।
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “कांग्रेस के लोग, राजद के लोग, सपा के लोग, स्टालिन जैसे लोग मिठाइयां बांट रहे हैं और जश्न मना रहे हैं। इन लोगों को समय आने पर एहसास होगा कि इनकी यह खुशी उन्हें कितनी महंगी पड़ेगी। ये लोग अपने घरों से जहां भी निकलेंगे, वहां इनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन होंगे। इतना बड़ा आरक्षण विधेयक, प्रधानमंत्री इसे पास कराना चाहते थे। इन्हें समय आने पर एहसास होगा। भारत की महिलाएं अब सिर्फ फूल नहीं हैं, वे चिंगारियां हैं। वे अब जाग चुकी हैं। विपक्ष को हर कदम पर उनके विरोध का सामना करना पड़ेगा।”
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पीएम मोदी पर की गई टिप्पणी पर संजय सरावगी ने कहा, “उनका पूरा परिवार अभी भी इटली के प्रति अपने मोह से बाहर नहीं निकल पाया है। यह मामला अभी अदालत में है और अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। राहुल गांधी की भाषा को देश के प्रति अपमानजनक और अनादरपूर्ण बताया गया है।”
बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने महिला आरक्षण बिल पर कहा, “2023 में महिला बिल जब लाया गया था तब सबने इसका समर्थन किया था। कांग्रेस ने भी समर्थन किया था और आज जब महिला आरक्षण को लागू करने की बारी आ रही है तो इसका विरोध वही लोग कर रहे हैं जिन्होंने समर्थन किया था। कांग्रेस मुख्य रूप से इसमें भूमिका अदा कर रही है। महिला का हक छीनना कांग्रेस और विरोधियों को महंगा पड़ेगा।”
लोकसभा में संविधान के 131वें संशोधन विधेयक के खारिज होने पर जेडीयू नेता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, “विधेयक के गिर जाने के बाद पूरे देश की महिलाएं खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं। जब यह विधेयक पारित नहीं हो सका, तो महिलाएं हतप्रभ और निशब्द रह गईं। एक बार फिर, कांग्रेस, टीएसी, डीएमके और ‘इंडी’ गठबंधन के अन्य दलों के आचरण और कार्यशैली में महिला-विरोधी रवैया स्पष्ट हो गया है।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं के लिए कोई ठोस पहल नहीं की। यह उनके लिए अपनी गलतियों को सुधारने का एक मौका था, लेकिन एक बार फिर उन्होंने इसे गंवा दिया। यह भी बिल्कुल साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इस विधेयक को पारित करने के लिए सभी को एक साथ आना चाहिए। संवैधानिक संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी और ऐसी स्थिति में विपक्ष का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण था।
–आईएएनएस
एसएके/वीसी
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