दिल्ली की सीमाओं पर किसानों को डेट हुए 50 दिन से ज्यादा का समय हो चुका है। बीते इन दिनों में केंद्र सरकार को किसान संगठनों के बीच 8 दौर की वार्ता बेनतीजा रहीं। किसानों की आपत्तियों पर विचार और उनके समाधान पर चर्चा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई समिति से खुद को अलग करने वाले किसान नेता भूपिंदर सिंह मान की प्रतिक्रिया सामने आई है।
भूपिंदर सिंह मान ने खुद को समिति से अलग करने का कारण बताया। उन्होंने कहा, आंदोलनकारी किसान कमेटी के समक्ष पेश नहीं होने का ऐलान कर चुके हैं, ऐसे में कमेटी में रहने का कोई तुक नहीं बनता है इसलिए मैंने कमेटी को छोड़ा है।”
गुरुवार को उन्होंने एक प्रेस नोट जारी करते हुए कहा, ‘मैं सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे इस कमेटी में मनोनीत किया, लेकिन खुद एक किसान और एक किसान नेता होने के नाते, आम लोगों और किसानों की चिंताओं को देखते हुए किसी भी पद की कुर्बानी के लिए तैयार हूं। मैं खुद को कमेटी से अलग करता हूं। मैं पंजाब और किसानों के साथ हूं।’
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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मंगलवार को 4 सदस्यीय समिति का गठन किया था, जिसमें कृषि वैज्ञानिक अशोक गुलाटी, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अनिल धनवत और भूपिंदर सिंह मान के नाम शामिल थे। ये समिति किसानों की आपत्तियों पर विचार और उनके समाधान पर चर्चा करने के लिए बनाई गई थी।
किसान केंद्र सरकार द्वारा लागू कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं।
26 नवंबर से इन कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने उसी दिन से दिल्ली आने वाली सीमाओं को अवरुद्ध कर दिया जिसके बाद इन मार्गो से दिल्ली में प्रवेश मुश्किल हो गया। इस मामले में पिछले 50 दिनों में केंद्र सरकार और किसानों के बीच 8 बार वार्ता हो चुकी है, हालांकि ये वार्ताएं पूरी तरह से विफल साबित हुईं।


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