बजट 2020 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लोकसभा में पेश करेंगी बजट

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लोकसभा में दूसरा आम बजट पेश करेंगी। वह ऐसे समय में यह बजट पेश करने जा रही हैं जब आर्थिक गतिविधयाँ छह वर्ष के निचले स्तर पर आ चुकी हैं और खुदरा महँगाई पाँच वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लोकसभा में दूसरा आम बजट पेश करेंगी। वह ऐसे समय में यह बजट पेश करने जा रही हैं जब आर्थिक गतिविधया छह वर्ष के निचले स्तर पर आ चुकी हैं और खुदरा महंगाई पांच वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। यह दर 11 साल में सबसे निचली वृद्धि होगी। भू-राजनीतिक क्षेत्र में तनाव फैला हुआ है और दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार युद्ध के बाद अब कुछ शांति दिख रही है। ऐसे में घरेलू अर्थव्यवस्था को गति देना वित्त मंत्री के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है।  
निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट 2020-21 पेश करने के लिए औपचारिक सहमति लेने के लिए राष्ट्रपति भवन जाएंगी।  राष्ट्रपति भवन से वित्त मंत्री कैबिनेट की बैठक के लिए संसद के लिए निकलेंगी, जहां बजट को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सुबह 11 बजे लोकसभा में केंद्रीय बजट पेश करेंगी।
आर्थिक गतिविधियों को पटरी पर लाकर वर्ष 2024-25 तक पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए लोगों, विशेषकर मध्यम वर्ग, की क्रय शक्ति को बढ़ने के उद्देश्य से आयकर में बड़ राहत दिये जाने की उम्मीद है लेकिन इससे राजस्व संग्रह प्रभावित हो सकता है।विश्लेषक ऐसी उम्मीद कर रहे हैं कि वित्त मंत्री कॉरपोरेट कर में कमी की तर्ज पर आयकर में भी छूट देकर लोगों की क्रय शक्ति को बढ़ सकती हैं। उनका कहना है कि ढाई लाख रुपये से लेकर पाँच लाख रुपये तक के पहले स्लैब पर कर की दर पाँच फीसदी बनी रह सकती है, लेकिन पाँच लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की आय पर कर को 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी किया जा सकता है। 
इसी तरह 10 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कर को भी 30 प्रतिशत से कम कर 20 प्रतिशत किया जा सकता है। आगामी वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी विकास दर में तेजी का अनुमान ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी विकास दर पांच फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। चालू वित्त वर्ष में जुलाई से सितंबर के दौरान जीडीपी विकास दर 4.5 फीसदी पर आ गई जोकि बीते छह साल का निचला स्तर था। आर्थिक विकास दर में आई इस गिरावट से सरकार पर सुधार के उपाय करने का दबाव बढ़ गया है। 

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