SC on Airfare Hike: दिवाली, छठ पूजा और होली जैसे बड़े त्योहारों पर हवाई टिकटों की कीमतें काफी बढ़ जाती हैं। ऐसे में आम यात्रियों के लिए हवाई सफर करना मुश्किल हो जाता है। इसी समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि दिवाली के दौरान घरेलू उड़ानों के किराये में बढ़ोतरी हो जाती है। उन्होंने इस पर रोक लगाने के लिए कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल सुनवाई करने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर हवाई टिकटों की कीमतें बहुत ज्यादा हैं, तो यात्री दूसरे साधनों से सफर कर सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, याचिका पर सुनवाई के लिए तीन जजों की पीठ के सामने मामला रखा गया था। इस पीठ में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह शामिल थे। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि दिवाली के समय हवाई टिकटों के दाम में 700 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि हवाई यात्रा अब लोगों की जरूरत बन चुकी है। ऐसे में किराये में इतनी अधिक वृद्धि करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।वकील ने देशभर के यात्रियों को राहत देने के लिए मामले की जल्द सुनवाई करने की मांग की। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि अगर हवाई किराया ज्यादा है, तो यात्री हवाई यात्रा न करें। पीठ ने टिप्पणी की, “हवाई यात्रा मत कीजिए। अगला मामला।” इसके साथ ही कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग को खारिज कर दिया।
हवाई किराये में बढ़ोतरी को लेकर क्या हैं सवाल?
- यह आवेदन पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक जनहित याचिका का हिस्सा है। इसमें हवाई टिकटों की कीमत तय करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं।
- याचिका में कहा गया है कि एयरलाइंस टिकटों के दाम तय करने के लिए ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं, जिनमें कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। इससे यात्रियों को कई बार आखिरी समय में बहुत महंगे टिकट खरीदने पड़ते हैं।
- इसके अलावा, एयरलाइनों की ओर से लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
- इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक ही दिन और एक ही जगह जाने वाली उड़ानों के अलग-अलग किराये पर चिंता जताई थी।
- कोर्ट ने कहा था कि एक एयरलाइन जहां टिकट के लिए 8,000 रुपये ले रही है, वहीं दूसरी कंपनी उसी उड़ान के लिए 18,000 रुपये वसूल रही है। ऐसे में किराये में कुछ समानता और सही व्यवस्था होनी चाहिए।
केंद्र सरकार ने क्या दिया था आश्वासन?
- सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया था कि हवाई किराये और एयरलाइनों के एक्स्ट्रा चार्ज को लेकर नए नियम तैयार किए जा रहे हैं।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि इन नियमों को दो हफ्ते के अंदर प्रकाशित कर दिया जाएगा। इसके बाद कोर्ट ने केंद्र को अगली सुनवाई पर नए नियम पेश करने का निर्देश दिया था। मामले को 16 नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
- केंद्र ने 16 अक्टूबर को बताया था कि किराये और एक्स्ट्रा चार्ज से जुड़े नियमों को आखिरी रूप दे दिया गया है और उन्हें प्रशासनिक मंजूरी भी मिल चुकी है।
2027 से लागू होंगे नए विमान नियम
- सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद केंद्र सरकार ने भारतीय वायुयान नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। ये नियम करीब 90 साल पुराने विमान नियम, 1937 की जगह लेंगे। नए नियम 1 जनवरी, 2027 से लागू होंगे।
- इन नियमों के तहत एयरलाइनों को टिकट की कुल कीमत के साथ मूल किराया, टैक्स और अन्य चार्ज की जानकारी अलग-अलग देनी होगी।
- इसके अलावा, टिकट रद्द करने का शुल्क और रिफंड से जुड़ी शर्तें भी यात्रियों को स्पष्ट रूप से बतानी होंगी। हवाई किराये पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की निगरानी भी जारी रहेगी।
- नए नियमों का उद्देश्य यात्रियों को टिकट की कीमतों और एक्स्ट्रा चार्ज की स्पष्ट जानकारी देना है, ताकि वे टिकट खरीदते समय सही फैसला ले सकें।


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