CBSE Three-Language Formula: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूली शिक्षा में एक बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नई शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के अनुरूप बोर्ड ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे कक्षा 6 के लिए ‘तीसरी भाषा’ के विकल्प को 31 मई 2026 तक अंतिम रूप दे दें। यह कदम छात्रों को भाषाई रूप से अधिक समृद्ध बनाने और उन्हें अलग-अलग संस्कृतियों से जोड़ने के उद्देश्य से उठाया गया है। सीबीएसई ने यह स्पष्ट किया है कि अब स्कूलों को अपने सिलेबस में भाषाओं के चयन को लेकर अधिक गंभीर होना होगा। इस नए निर्देश के बाद स्कूलों के पास अब बहुत कम समय बचा है ताकि वे यह तय कर सकें कि उनके छात्र कौन सी तीन भाषाएं पढ़ेंगे।
नया भाषाई ढांचा
सीबीएसई के इस नए ढांचे के तहत, छात्रों को अब अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान तीन भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी। छात्रों को कम से कम दो भारतीय भाषाओं का चुनाव करना अनिवार्य होगा। तीसरी भाषा के रूप में छात्र किसी भी अन्य भाषा (भारतीय या विदेशी) को चुन सकते हैं। यह फॉर्मूला मुख्य रूप से कक्षा 6 से प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि छात्र छोटी उम्र से ही बहुभाषी बन सकें। बोर्ड ने स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे मई के अंत तक अपनी तैयारियों को पूरा कर लें। इसका मुख्य कारण यह है कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और छात्रों को अपनी पसंद की भाषा चुनने और उसकी किताबें उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।


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