Maharashtra News : महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा बदलाव हुआ है। अब राज्य के मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडनवीस मंत्रालय के उन मामलों में भी दखल दे सकेंगे जिनमें पहले वे नहीं दे सकते थे। बता दें सरकार ने राज्य के प्रशासनिक कामकाज को लेकर बड़ा और निर्णायक फैसला लिया है। इसके तहत महाराष्ट्र शासन कार्य संचालन नियम में सशोधन किया गया है।
अब नए नियमों के लागू होने से मुख्यमंत्री के प्रशासनिक अधिकारों का दायरा और स्पष्ट हो गया है। इसके चलते अब मुख्यमंत्री के पास और अधिक ताकत हो गई है। यानी अब सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री किसी भी कैबिनेट मंत्री द्वारा लिए गए फैसले को पलट सकते हैं या उसे पूरी तरह रद्द कर सकते हैं।
हालांकि, किसी मंत्री के फैसले में बदलाव करते समय मुख्यमंत्री को उसका ठोस कारण लिखित में दर्ज करना जरूरी होगा। वहीं, अर्धन्यायिक मामलों में मुख्यमंत्री को यह हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं दिया गया है।
फाइलों की मांग और मुख्य सचिव के अधिकार
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से अधिसूचित इन नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री किसी भी विभाग की कोई भी फाइल या जरूरी रिकॉर्ड सीधे अपने पास मंगवा सकते हैं। संबंधित मंत्री और विभाग के सचिव को यह दस्तावेज तुरंत पेश करने होंगे।
इसी तर्ज पर मुख्य सचिव को भी किसी भी विभाग के सचिव से प्रशासनिक जानकारी और दस्तावेज मांगने की शक्ति दी गई है। यदि किसी सरकारी नियम की व्याख्या को लेकर विभागों के बीच कोई विवाद या असमंजस होता है, तो अंतिम फैसला मुख्यमंत्री का ही माना जाएगा।
संशोधन की मूल वजह क्या
दरअसल, 2022 में चंद्रपुर जिला मध्यवर्ती बैंक भर्ती से जुड़ा एक मामला सामने आया था, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप पर बंबई हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने आपत्ति जताई थी।
अदालत ने कहा था कि तत्कालीन नियमों के तहत मुख्यमंत्री के पास मंत्री के फैसले को समीक्षा करने या रद्द करने की स्वतंत्र शक्ति नहीं है। इसी अदालती टिप्पणी के मद्देनजर अब सरकार ने नए कार्य संचालन नियमों में कानूनी प्रावधान जोड़कर मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप करने के अधिकार को स्पष्ट और वैधानिक बना दिया है।
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