पश्चिम एशिया में जारी तनावों के बीच आज भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। बाजार में गिरावट की लहर जारी है औरर यह लगातार सातवां दिन है जब सेंसेक्स और निफ्टी में बिकवाली का दबाव बना रहा, लेकिन आईटी शेयरों में खरीदारी से कुछ Index को हल्का समर्थन मिला। सेंसेक्स 17.41 अंक की मामूली गिरावट के साथ 77,218.05 पर सपाट खुला। लेकिन बाद में 0.31 प्रतिशत यानी 244 अंक गिरकर 76,991.28 का इंट्रा-डे लो छुआ।
वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 2.85 अंक की मामूली गिरावट के साथ 24,152.05 पर सपाट खुला। लेकिन सुबह 11 बजे तक 90 अंक फिसलकर 24,065.10 का दिन का लो और 24,172.85 का दिन का हाई छुआ।
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 340 से अधिक अंक की गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 50 भी 100 से अधिक अंको की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप 0.39 प्रतिशत और 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।
आईटी शेयरों का बेहतर प्रदर्शन
बाजार में आईटी शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी आईटी सूचकांक 0.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ टॉप पर रहा। इसके अलावा, निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम में 0.59 प्रतिशत की तेजी और निफ्टी एफएमसीजी में 0.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। रियल्टी और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट्स) से जुड़े सूचकांकों में भी लगभग 0.2 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली, जबकि वहीं, ऑयल एंड गैस में 0.08 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखने को मिली।
दूसरी ओर, मेटल और ऑटो शेयरों में दबाव बना रहा। निफ्टी मेटल 0.35 प्रतिशत टूट गया, जबकि निफ्टी ऑटो में 0.14 प्रतिशत की गिरावट रही। हेल्थकेयर, फार्मा और केमिकल्स से जुड़े सूचकांकों में भी हल्की कमजोरी दर्ज की गई।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का कारण
भारतीय शेयर बाजार में 7 दिन से लगातार गिरावट देखी जा रही है। जानते है बाजार विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट के मुख्य कारण।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल और वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचे स्तर पर बने रहना है।
- पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष को लेकर तेल कीमतों में तेजी बनी हुई है। इससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और बॉन्ड यील्ड पर भी दबाव पड़ा है।
- अमेरिकी 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड वर्ष 2007 के बाद के उच्चतम स्तरों पर पहुंच गई है, जिससे वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद, GDP में उछाल, 2026-27 साल में कॉरपोरेट आय में सुधार की उम्मीद और घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी बाजार को सहारा दे रही है।
एशियाई बाजारों में भी गिरावट
भारतीय शेयर बाजार के साथ एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। सेमीकंडक्टर शेयरों में दबाव और पश्चिम एशिया की परिस्थितियों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया, जो पिछले तीन सप्ताह का उच्चतम स्तर है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति में स्पष्ट सुधार नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।



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