प्रदूषण पर लगाम, 2025 में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन वृद्धि 24 साल में सबसे कम

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CO2 Emission Growth Lowest in 24 Years: पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में देश के कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में केवल 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यदि 2020 के कोरोना काल को अलग रखा जाए, तो यह पिछले 24 वर्षों में उत्सर्जन वृद्धि की सबसे धीमी दर है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विश्लेषण के अनुसार, भारत अब प्रदूषण नियंत्रण के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है। बिजली क्षेत्र में आया सुधार इस सकारात्मक बदलाव का…

CO2 Emission Growth Lowest in 24 Years: पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में देश के कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में केवल 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यदि 2020 के कोरोना काल को अलग रखा जाए, तो यह पिछले 24 वर्षों में उत्सर्जन वृद्धि की सबसे धीमी दर है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विश्लेषण के अनुसार, भारत अब प्रदूषण नियंत्रण के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है।

बिजली क्षेत्र में आया सुधार

इस सकारात्मक बदलाव का सबसे बड़ा कारण बिजली क्षेत्र में आया सुधार है। रिपोर्ट के अनुसार, बिजली उत्पादन से होने वाले उत्सर्जन में 3.8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके पीछे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और बिजली की मांग में गिरावट प्रमुख कारण रहे हैं। जहां पहले बिजली की मांग 7 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ रही थी, वहीं 2025 में यह वृद्धि घटकर करीब 1 प्रतिशत रह गई। इससे कोयले पर निर्भरता में कमी आई है और नवीकरणीय ऊर्जा का महत्व तेजी से बढ़ा है।

आयातित कोयले में 20 प्रतिशत की कमी

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 वह वर्ष हो सकता है जब स्वच्छ ऊर्जा की वृद्धि दर देश की कुल बिजली मांग से आगे निकल जाएगी। यह बदलाव भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत को लाभ हुआ है। बिजली संयंत्रों में उपयोग होने वाले आयातित कोयले में 20 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि गैस आयात में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। पेट्रोल और डीजल की मांग में भी केवल 0.4 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई है। सीआरईए की विश्लेषक अनुभा अग्रवाल के अनुसार, इससे वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कम पड़ेगा।

इस्पात और सीमेंट जैसे भारी उद्योगों में उत्सर्जन पर नियंत्रण की जरूरत

कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। इस्पात और सीमेंट जैसे भारी उद्योगों में उत्सर्जन लगातार बढ़ रहा है। इस्पात क्षेत्र में 8 प्रतिशत और सीमेंट क्षेत्र में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। यदि यही रुझान जारी रहा, तो भारत जल्द ही कोयले पर निर्भरता कम कर हरित ऊर्जा युग में प्रवेश कर सकता है।

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Himanshu Negi

हिमांशू नेगी को देश-विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने GGSIPU से संबद्ध LLDIMS कॉलेज से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन (BJMC) की पढ़ाई की है। इसके बाद HNBGU Central University से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MAJMC) पूरा किया और पत्रकारिता की शुरुआत की। दैनिक जागरण और IJCP Pvt Ltd. में इंटर्नशिप करने के बाद उन्होंने सुदर्शन टीवी चैनल में 9 PM शो के लिए प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।