रेल यात्रा होगी और आरामदायक, रेलवे अपनाएगा कॉम्पोजिट स्लीपर और AI ट्रैक मोनिटरिंग, अब कम होंगे झटके

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Composite Sleepers in Indian Railways : भारतीय रेलवे आने वाले समय में रेल यात्रा को अधिक आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए नई तकनीक अपनाने की तैयारी कर रहा है। रेलवे का कहना है कि जल्द ही ट्रैक पर कॉम्पोजिट स्लीपर लगाए जाएंगे, जिससे ट्रेन के गुजरने के दौरान यात्रियों को कम झटके महसूस होंगे। इस संबंध में गुरुवार को रेल मंत्रालय में आयोजित बैठक में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को इस योजना को लागू करने के निर्देश दिए। क्या हैं कॉम्पोजिट स्लीपर रेलवे के अनुसार, अब पुलों के एप्रोच और पॉइंट्स व क्रॉसिंग पर इस्तेमाल होने वाले…

Composite Sleepers in Indian Railways : भारतीय रेलवे आने वाले समय में रेल यात्रा को अधिक आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए नई तकनीक अपनाने की तैयारी कर रहा है। रेलवे का कहना है कि जल्द ही ट्रैक पर कॉम्पोजिट स्लीपर लगाए जाएंगे, जिससे ट्रेन के गुजरने के दौरान यात्रियों को कम झटके महसूस होंगे।

इस संबंध में गुरुवार को रेल मंत्रालय में आयोजित बैठक में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को इस योजना को लागू करने के निर्देश दिए।

क्या हैं कॉम्पोजिट स्लीपर

रेलवे के अनुसार, अब पुलों के एप्रोच और पॉइंट्स व क्रॉसिंग पर इस्तेमाल होने वाले स्लीपर कॉम्पोजिट सामग्री से बनाए जाएंगे। मौजूदा लोहे और कंक्रीट के भारी स्लीपरों की तुलना में ये नए स्लीपर हल्के होने के साथ-साथ अधिक मजबूत भी होंगे।

इनकी खासियत यह है कि ये अधिक भार सहन कर सकते हैं और इनमें बेहतर कुशनिंग होती है, जिससे ट्रेन के गुजरने पर झटके कम महसूस होते हैं। इसके अलावा इनकी स्थापना और मरम्मत भी अपेक्षाकृत आसान बताई जा रही है।

जगह की जरूरत के अनुसार बनाए जाएंगे स्लीपर

कॉम्पोजिट स्लीपरों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि उन्हें अलग-अलग स्थानों की जरूरत के मुताबिक तैयार किया जा सके। रेलवे का मानना है कि इनके इस्तेमाल से खासकर पुलों और क्रॉसिंग वाले हिस्सों से गुजरते समय यात्रियों को ज्यादा आरामदायक अनुभव मिलेगा।

रेल भवन में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों को बताया गया कि कॉम्पोजिट सामग्री से बने ये स्लीपर प्रति वर्ग सेंटीमीटर लगभग 700 किलोग्राम तक भार सहन करने में सक्षम हैं। इसके अलावा इनकी उम्र भी पारंपरिक स्लीपरों से अधिक हो सकती है।

इनके उपयोग से रेलवे को मौजूदा स्लीपरों के रखरखाव पर होने वाले खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।

AI तकनीक से होगी ट्रैक की निगरानी

रेलवे ने ट्रैक की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के इस्तेमाल का भी निर्णय लिया है। इसके तहत निरीक्षण करने वाली विशेष ट्रेनों में AI आधारित उपकरण लगाए जाएंगे।

इनमें ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार नाम की तकनीक का उपयोग होगा, जो रेलवे ट्रैक की नींव और संरचना की स्थिति का विश्लेषण करेगी।

रेल पटरियों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रेलवे ने मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग तकनीक अपनाने का भी फैसला किया है। यह तकनीक वेल्डिंग में मौजूद बेहद छोटे दोषों की पहचान करने में मदद करती है, जिससे ट्रैक की सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित की जा सकेगी।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।