DASS Cadre Promotion: केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दमन और दीव और दादरा और नगर हवेली (सिविल) सेवा (दानिक्स) की तरफ से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें दिल्ली प्रशासनिक अधीनस्थ सेवाओं (डीएएसएस) के लिए ग्रुप ए पदों को सृजित किए जाने को चुनौती दी गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद एलजी द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में ग्रुप ए के 227 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई थी ताकि समय पर डीएएसएस कैडर के अधिकारियों को प्रमोशन का लाभ मिल सके और वे प्रमोट होकर दानिक्स कैडर में जा सके। हांलाकि दानिक्स ने इस फैसले को कैट के समक्ष चुनौती दी और कहा कि नियमों का उल्लंघन कर इन पदों को सृजन कर उसे डीएएसएस कैडर को दिया गया जबकि ये पद दानिक्स कैडर के लिए हैं।
दानिक्स के आरोप और न्यायाधिकरण का विधिक दृष्टिकोण
दानिक्स ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि नियमों व प्रक्रियाओं को दरकिनार कर डीएएसस के पक्ष में आदेश जारी किया गया था और ग्रुप ए के पद सृजन के लिए उप राज्यपाल सक्षम प्राधिकारी नहीं है। याचिका में कहा गया था कि इस पूरे मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन किया गया और दानिक्स द्वारा द्वारा उठाई गई शिकायतों व मुद्दों पर गौर नहीं किया गया। हांलाकि दानिक्स की तरफ से दायर याचिका को खारिज करते हुए न्यायाधिकरण ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी ओर से लगाए गए आरोपों को साबित करने में पूरी तरफ से विफल रहे और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे सर्विस से संबंधित हैं न कि संवैधानिक। न्यायाधिकरण ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 के तहत भेदभाव के आरोप के साबित करना जरुरी है। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के सदस्य राजिंदर कश्यप व चेयरमैन जस्टिस रंजीत मोरे ने कहा कि मौजूदा याचिका में कोई मेरिट न होने के चलते इसे खारिज किया जाता है।


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