ई-सिगरेट को गेटवे बनने से रोकने के लिए शिक्षा मंत्रालय का बड़ा कदम, पाठ्यक्रम में शामिल होंगे वैपिंग के खतरे

Summary :

E-cigarette Prevention Initiative: ‘मदर्सअगेंस्ट वैपिंग’ (एमएवी) द्वारा आयोजित एक उच्च-स्तरीय सेमिनार में भारत के शिक्षा जगत के प्रमुख नीति-निर्माता, संस्थानों के प्रमुख और स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक मंच पर आए। सभी विशेषज्ञों ने लर्निंग फ्रेमवर्क में ‘मूल्य आधारित शिक्षा’ (वैल्यू एजुकेशन) को और अधिक गहराई से शामिल करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य एक अनुशासित, जिम्मेदार और भविष्य के लिए सजग पीढ़ी का निर्माण करना है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का अपना सपना साकार करना है, तो भावी पीढ़ी का पालन-पोषण इस प्रकार किया जाना चाहिए कि उनमें…

E-cigarette Prevention Initiative: ‘मदर्सअगेंस्ट वैपिंग’ (एमएवी) द्वारा आयोजित एक उच्च-स्तरीय सेमिनार में भारत के शिक्षा जगत के प्रमुख नीति-निर्माता, संस्थानों के प्रमुख और स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक मंच पर आए। सभी विशेषज्ञों ने लर्निंग फ्रेमवर्क में ‘मूल्य आधारित शिक्षा’ (वैल्यू एजुकेशन) को और अधिक गहराई से शामिल करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य एक अनुशासित, जिम्मेदार और भविष्य के लिए सजग पीढ़ी का निर्माण करना है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का अपना सपना साकार करना है, तो भावी पीढ़ी का पालन-पोषण इस प्रकार किया जाना चाहिए कि उनमें मजबूत चरित्र और सुदृढ़ मूल्यों का विकास हो सके।

नई दिल्ली में ‘मूल्यों की शिक्षा, बच्चों की सुरक्षा

‘नए निकोटीन उत्पादों को बच्चों से दूर रखना’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को नशे की लत से बचाना सिर्फ नियामकीय विषय नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक जिम्मेदारी है। इसके लिए भारत की भावी पीढ़ी के हर अभिभावक की ओर से लगातार प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

पीईसीए (PECA) 2019 की चुनौतियां

ई-सिगरेट के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण एवं विज्ञापन पर रोक लगाने के लिए भारत में ‘इलेक्ट्रॉनिकसिगरेट निषेध अधिनियम’ (पीईसीए), 2019 लागू होने के बावजूद ये उत्पाद अनौपचारिक और अनियमित माध्यमों से स्कूली बच्चों तक पहुंचते रहते हैं। युवाओं के बीच वैपिंग के बढ़ते चलन को स्वीकारते हुए शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त निदेशक राम सिंह ने कहा कि पहले यह सोच थी कि बच्चे और उनका सही विकास केवल स्कूलों की जिम्मेदारीहै। हालांकि, अब यह स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि हम अपने बच्चों को किस तरह से गढ़ पाते हैं, इसके लिएप्रवर्तन एजेंसियां भी उतनी ही जिम्मेदार हैं। आज, तीनों एजेंसियों – शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रवर्तन को मिलकर कामकरने की जरूरत है, ताकि हम मजूबत और सही मूल्यों के साथ बच्चोंका पालन-पोषण सुनिश्चित कर सकें।”

विकसित भारत का विजन: उच्च शिक्षा और नैतिक मूल्यों का एकीकरण

उच्च शिक्षा के दृष्टिकोण को सामने रखते हुए यूजीसी स्टीयरिंग कमेटी, एलओसीएफ की चेयरपर्सन प्रो. डॉ. सुषमा यादव ने कहा, “यह महज कोई मेडिकल, कानूनी या प्रशासनिक चिंता नहीं है, यह हम सभी के लिए चिंता का विषय है। अगर हम प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजनको लेकर सचमुच गंभीर हैं, तो हम ऐसे बच्चों के साथ आगे नहीं बढ़ सकते जो ई-सिगरेट और वैपिंग प्रोडक्ट्स जैसे नुकसानदायक पदार्थों का सेवन करते हुए बड़े हो रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि यूजीसी अपने एलओसीएफ फ्रेमवर्क के जरिये और एनसीईआरटी स्कूली स्तर पर पाठ्यक्रम में मूल्यों को शामिल करने पर काम कर रहे हैं। हालांकि सिर्फ पाठ्यक्रम पर्याप्त नहीं है। मूल्य सिर्फ सिखाए नहीं जा सकते हैं, बल्कि बच्चे अपने आसपास देखकर हर चीज से सीखते हैं।

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Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।