नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली मास्टर प्लान 2047, यमुना की सफाई और राजधानी में प्रदूषण की समस्या पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि यह मास्टर प्लान दिल्ली के भविष्य की तस्वीर बदल देगा।
मंत्री आशीष सूद ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “दिल्ली मास्टर प्लान 2047 से यह साफ हो गया है कि भले ही दिल्ली में जमीन सीमित है, लेकिन शहर का विजन सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली अब ऊपर की ओर (वर्टिकली) बढ़ेगी। इसमें रिवर कनेक्टर्स, अरावली में ग्रीन स्पेस, पार्क कनेक्टर्स और साइकिलिंग ट्रैक होंगे। अगर इसकी मुख्य विशेषताओं को देखें, तो मास्टर प्लान ने दिल्ली को एक विकसित राज्य बनाने का रास्ता खोल दिया है।”
उन्होंने कहा कि प्लान्ड इलाकों में मास्टर प्लान ने 3,000 वर्ग मीटर के इलाकों के रीडेवलपमेंट का रास्ता साफ किया है। इसमें 1.5 के फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) के साथ 3,000 वर्ग मीटर में बने डीडीए फ्लैट्स का रीडेवलपमेंट शामिल है, जिससे ज्यादा और बड़े घर मिल सकेंगे। जिन लोगों ने पुराने फ़्लैट खरीदे थे, उन्हें अब वे छोटे लगने लगे हैं क्योंकि उनके परिवार बड़े हो गए हैं। चूंकि दिल्ली में नई जमीन नहीं बनाई जा सकती, इसलिए यह प्लान इन प्रॉपर्टीज के रीडेवलपमेंट का मौका देता है। इसी तरह, अनधिकृत कॉलोनियों में 2,000 वर्ग मीटर के इलाकों को सामूहिक रूप से विकसित किया जाएगा।”
ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसके जरिए प्रदूषण और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। मेट्रो लाइनों के 500 मीटर के दायरे में किफायती घर बनाए जाएंगे, ताकि लोग आसानी से घर से निकलकर मेट्रो से काम पर जा सकें और वापस सीधे मेट्रो से घर पहुंच सकें। इस दूरदर्शी सोच के साथ, दिल्ली को एक विकसित भारत की राजधानी बनाने का संकल्प लिया गया है।
मंत्री आशीष सूद ने बताया कि इस बार मास्टर प्लान की सबसे अहम बात इसमें ‘कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान’ को शामिल किया जाना है, जो जमीन के इस्तेमाल को ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जोड़ता है। इसका मकसद मेट्रो, सड़कों और ट्रांसपोर्ट सिस्टम को एक साथ लाना और एक इंटीग्रेटेड अप्रोच के जरिए नई पेरिफेरल सड़कों के निर्माण और जमीन के इस्तेमाल पर लगी पाबंदियों से जुड़े मुद्दों को हल करना है।
यमुना को दिल्ली से जोड़ने की योजना पर उन्होंने कहा, “इस बार, मास्टर प्लान में शहर को यमुना के किनारे वाले इलाकों से जोड़ने के लिए नदी को जोड़ने वाले रास्तों का प्रावधान है। इसमें अरावली में खुली और हरी-भरी जगहें बनाने के साथ-साथ 50 किलोमीटर के साइकिल ट्रैक और 200 किलोमीटर से ज्यादा ‘पार्क कनेक्टर्स’ बनाने का प्रस्ताव भी है।”
उन्होंने कहा कि साहिबी नदी के आस-पास के इलाके आम तौर पर खाली छोड़ दिए जाते हैं और अक्सर कचरा फेंकने की जगह बन जाते हैं। अब इन इलाकों को पार्क के तौर पर विकसित किया जा रहा है और आस-पास की हरी-भरी जगहों से जोड़ा जा रहा है। यह दिल्ली को एक बहुत दूर की सोच के साथ विकसित करने की कोशिश है।
यमुना की सफाई पर बोलते हुए मंत्री ने कहा, “सालों तक यमुना में गिरने वाले नालों पर कोई काम नहीं हुआ। अब, रिवर कनेक्टर्स के डेवलपमेंट से, यमुना इन कॉरिडोर के ज़रिए बाकी दिल्ली से जुड़ जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की लीडरशिप में, यमुना में गिरने वाले नालों पर एसटीपी लगाने का काम पहले से ही चल रहा है और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है।”
–आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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