एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं, 4 मई के परिणाम का करेंगे इंतजार: मनोज झा

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नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद मनोज झा ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें एग्जिट पोल पर कोई भरोसा नहीं है और नतीजों का इंतजार 4 मई को खत्म होगा। राजद सांसद का यह बयान उस वक्त आया है जब एग्जिट पोल में ज्यादातर राज्यों में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है, असम में भाजपा की वापसी हो रही है। नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में राजद सांसद मनोज झा ने एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा…

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद मनोज झा ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें एग्जिट पोल पर कोई भरोसा नहीं है और नतीजों का इंतजार 4 मई को खत्म होगा।

राजद सांसद का यह बयान उस वक्त आया है जब एग्जिट पोल में ज्यादातर राज्यों में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है, असम में भाजपा की वापसी हो रही है।

नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में राजद सांसद मनोज झा ने एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम तौर पर कहूं तो, जब से मैं राजनीति में सक्रिय हूं, एग्जिट पोल्स को लेकर मेरा नजरिया यह रहा है कि वे बहुत भरोसेमंद नहीं होते। यह कुछ वैसा ही है जैसे लोग क्रिकेट में ड्रीम-11 पर सट्टा खेलते हैं, या जुआ लगाते हैंस यह अपनी खुद की ‘प्लेइंग इलेवन’ बनाने और अपना खुद का अनुमान लगाने जैसा है। मैं तो यही कहूंगा कि हमें 4 मई का इंतजार करना चाहिए और उसके बाद ही इस पर चर्चा करना बेहतर होगा।

हेट स्पीच को लेकर राजद सांसद ने सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करते हुए कहा कि जब चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ है और अंधेरे के व्यापारी सत्ता तक पहुंच गए हैं, तो रोशनी की बहुत जरूरत है, लेकिन न्यायालय चुप्पी साधे हुए है।

बंगाल में दूसरे चरण की मतदान के दौरान हुई भारी वोटिंग और कुछ जगहों पर टेपिंग की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मैं यह बात सीधे-सीधे कहना चाहता हूं। जिस अनुपात और प्रतिशत की आप सब बात कर रहे हैं, उसके बारे में मैं यह कहना चाहूंगा कि ‘रियल-टाइम डेटा’ असल हकीकत से अलग होता है। यह कुछ वैसा ही है, जैसे हम बजट की बात करते हैं। उदाहरण के लिए, हम कहते हैं कि शिक्षा के लिए और ज़्यादा फंड दिया जाना चाहिए, लेकिन हम हमेशा इस बात पर ध्यान नहीं देते कि प्रतिशत के हिसाब से इसका क्या मतलब निकलता है। मेरी चिंता इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। आज भी लाखों लोग ऐसे हैं, जो ट्रिब्यूनल में अपने नाम की स्पष्टता को लेकर परेशान हैं।

उन्होंने कहा कि कई हजार लोगों के वोट इस चुनाव में ‘मिसिंग’ हो गए हैं और ऐसी गड़बड़ियों की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव आयोग की नहीं, बल्कि जिनके हाथ में इसका नियंत्रण है, उनकी भी है।

–आईएएनएस

डीकेएम/पीएम

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