Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रिश्तों के टूटने के बाद उन्हें आपराधिक मामलों में बदलने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी रिश्ते के खत्म हो जाने मात्र से उसमें आपसी सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधों को बाद में रेप नहीं कहा जा सकता।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने यह टिप्पणी केरल के रहने वाले संतोष कुमार एनपी को बलात्कार और धोखाधड़ी के आरोपों से डिस्चार्ज करते हुए की। शीर्ष अदालत ने जानबूझकर दिए गए धोखे और रिश्ता टूटने के बाद होने वाले पछतावे के बीच स्पष्ट अंतर रेखांकित किया।
‘रिश्ता खत्म करने का फैसला धोखाधड़ी नहीं’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक रिश्ता ठीक चल रहा था, उस दौरान बनी सहमति को संबंध बिगड़ने पर अपराध नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या किसी पुरुष को रिश्ता खत्म करने का अधिकार नहीं है? क्या उसका यह निर्णय छल या धोखाधड़ी माना जाएगा?
पीठ ने स्पष्ट किया कि बलात्कार एक बेहद गंभीर अपराध है और इसका इस्तेमाल केवल जबरन यौन हिंसा या दबाव में ली गई सहमति जैसे मामलों में ही होना चाहिए। हर टूटे हुए रिश्ते को रेप केस में बदलने से इस अपराध की गंभीरता कम होती है।
सुप्रीम कोर्ट में दी थी हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती
यह मामला एक याचिकाकर्ता पर लगे उन आरोपों से जुड़ा था, जिसमें कहा गया था कि उसने अपनी पहली शादी की बात छिपाकर दूसरी शादी की और धोखे से सहमति लेकर संबंध बनाए। आरोपी ने केरल हाई कोर्ट द्वारा मामला रद्द करने से इनकार करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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