गुजरात में यूसीसी बिल पास होने पर अमित शाह बोले- देश समान कानून से चले, ये हमारा संकल्प

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नई दिल्ली/गांधीनगर, 25 मार्च (आईएएनएस)। उत्तराखंड के बाद एक और भाजपा शासित राज्य गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित हो गया है। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुशी जताते हुए कहा कि देश सभी नागरिकों के लिए समान कानून से चले, यह हमारी प्राथमिकता भी है और संकल्प भी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “देश में हर नागरिक के लिए एक समान कानून हो, यह भाजपा का स्थापना से ही संकल्प रहा है। मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की राज्य सरकारें…

नई दिल्ली/गांधीनगर, 25 मार्च (आईएएनएस)। उत्तराखंड के बाद एक और भाजपा शासित राज्य गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित हो गया है। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुशी जताते हुए कहा कि देश सभी नागरिकों के लिए समान कानून से चले, यह हमारी प्राथमिकता भी है और संकल्प भी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “देश में हर नागरिक के लिए एक समान कानून हो, यह भाजपा का स्थापना से ही संकल्प रहा है। मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की राज्य सरकारें इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “मुझे हर्ष है कि उत्तराखंड के बाद अब गुजरात ने भी समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित करने का ऐतिहासिक कार्य कर अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई है। इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और इस बिल को समर्थन देने वाले सभी विधायकों को बधाई देता हूं।”

गृह मंत्री अमित शाह ने ‘एक्स’ पोस्ट में फिर से कहा, “देश तुष्टीकरण के आधार पर नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून से चले, यह हमारी प्राथमिकता भी है और संकल्प भी है।”

बता दें कि गुजरात विधानसभा ने मंगलवार को सात घंटे से अधिक समय चली बहस के बाद यूसीसी विधेयक को पास किया। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सदन में यह बिल पेश किया था। इसके साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है, जिसने यूसीसी को अपनाया है। उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य था, जिसने फरवरी 2024 में यूसीसी बिल पास किया।

‘गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026’ कानून पूरे राज्य में लागू होगा। हालांकि, विधेयक में यह साफ किया गया है कि यह कोड अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के सदस्यों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित हैं।

–आईएएनएस

डीसीएच/

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