नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में संतुलन और मानसिक शांति बनाए रखने का एकमात्र तरीका योगासन है। इन्हीं में से वृक्षासन एक ऐसा योगासन है, जो शरीर और मन दोनों को स्थिरता प्रदान करने में मदद करता है।
वृक्षासन एक संस्कृत शब्द है, ‘वृक्ष’ का अर्थ ‘पेड़’ से लिया गया है। यह आसन हमें पेड़ के समान संतुलन बनाना सिखाता है। जैसे एक पेड़ अपनी जड़ों के बल पर मजबूती से खड़ा रहता है और तेज हवा-बारिश में भी नहीं गिरता, वैसे ही यह आसन हमें जीवन में आने वाली मुश्किलों में भी शांत और स्थिर रहना सिखाता है।
इस आसन को करने से पैरों की ताकत बढ़ती है, शरीर का संतुलन बेहतर होता है और ध्यान (फोकस) भी बढ़ता है। यह एक पैर पर खड़े होकर नमस्कार मुद्रा करके किया जाने वाला योगासन है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी इसके महत्व पर प्रकाश डाला है। उनके अनुसार, यह एक संतुलनकारी योगासन है, जो एकाग्रता, मानसिक स्पष्टता और शारीरिक स्थिरता बढ़ाने में मदद करता है। इसके नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत बनती है, पैरों की मांसपेशियों को टोन करता है और ‘न्यूरो-मस्कुलर को-ऑर्डिनेशन’ को बेहतर बनाता है। इसके अलावा, यह वात दोष को संतुलित कर तनाव मुक्त करता है और एकाग्रता बढ़ाता है।
हालांकि, इस आसन को सुबह खाली पेट करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं। समय न मिल पाने की वजह से अगर आप इसे शाम के समय कर रहे हैं, तो भोजन करने के 4 से 6 घंटे पहले ही आसन कर लें।
योग विशेषज्ञ बताते हैं कि वृक्षासन करने से पहले त्रिकोणासन, वीरभद्रासन और बद्ध कोणासन किया जाना चाहिए। वहीं, इस आसन को वही लोग करें जो किसी भी प्रकार की शारीरिक बीमारी से नहीं जूझ रहे हैं।
कोई भी व्यक्ति गंभीर चोट या फिर किसी बीमारी से जूझ रहा है, तो वह इस योगासन को करने से बचें या फिर किसी योग विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें।
–आईएएनएस
एनएस/पीएम
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