जयपुर, 7 अगस्त (आईएएनएस)। राजस्थान में अलवर के एक प्राइवेट अस्पताल में बच्चे के जन्म के बाद महिला की मौत हो जाने से हड़कंप मच गया। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया। नागला रायसिस के निशु अस्पताल में हुई इस घटना को गंभीरता से लेते हुए, चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव गायत्री राठौड़ ने शुक्रवार को अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
विभाग की जांच में पता चला कि किसी क्वालिफाइड डॉक्टर की गैर-मौजूदगी में नर्सिंग स्टाफ के एक सदस्य ने डिलीवरी कराई थी, जिससे मरीज की मौत हो गई।
यह मामला स्वास्थ्य भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए गायत्री राठौड़ की अध्यक्षता में हुई मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और मातृ मृत्यु के मामलों की समीक्षा बैठक के दौरान सामने आया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह घटना 4 अगस्त को हुई थी, जब साहिल खान की पत्नी अंजुम (पिंकी) को डिलीवरी के लिए निशु अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला कि नर्सिंग स्टाफ के एक सदस्य ने डॉक्टर की देखरेख के बिना डिलीवरी कराई, जिसके बाद महिला की मौत हो गई। घटना सामने आने के बाद विभाग ने अस्पताल के खिलाफ तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।
जांच के दौरान अनियमितताएं पाए जाने के बाद विभाग ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों के तहत निशु अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया है। अस्पताल के सभी कामकाज को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर अस्पताल संचालक भुवनेश कुमार शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा, नर्सिंग काउंसिल को भी एक पत्र भेजकर रफिकन बानो के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। रफिकन बानो नर्सिंग स्टाफ की सदस्य हैं, जिन्होंने कथित तौर पर डिलीवरी कराई थी।
समीक्षा बैठक के दौरान, गायत्री राठौड़ ने अधिकारियों को गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच का सही और अपडेटेड रिकॉर्ड रखने और डेटा को समय पर अपलोड करने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर्स, चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर्स, मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों और विशेषज्ञों को निर्देश दिया कि वे हाई-रिस्क प्रेगनेंसी के मामलों को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ देखें।
प्रधान सचिव ने यह भी आदेश दिया कि अजमेर डिवीजन में हाई-रिस्क प्रेगनेंसी से जुड़े काम में लापरवाही बरतने पर संबंधित डिवीजनल जॉइंट डायरेक्टर को नोटिस जारी किया जाए।
समीक्षा में सरकारी अस्पतालों में बायोमेडिकल उपकरणों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अतिरिक्त, काम न करने वाले और मरम्मत योग्य उपकरणों की जानकारी ई-उपकरण पोर्टल पर अपडेट करें। राठौड़ ने मेंटेनेंस एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे दोबारा इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों की बिना देरी के मरम्मत करें ताकि अस्पताल के संसाधनों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो सके और मरीजों की देखभाल बेहतर हो सके।
–आईएएनएस
एमएस/
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