सीएम हिमंता ने इसरो के जीएसएलवी-एफ18 लॉन्च की सराहना की, कहा-इससे भारत की रक्षा क्षमताओं को मिला बढ़ावा

Summary :

गुवाहाटी, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों को बधाई दी। यह बधाई एनवीएस-03 नेविगेशन सैटेलाइट ले जाने वाले जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के सफल प्रक्षेपण के बाद दी गई। उन्होंने इस मिशन को भारत की स्वदेशी नेविगेशन क्षमताओं में एक बड़ा मील का पत्थर बताया। एक्स पर पोस्ट में सीएम सरमा ने कहा कि इस सफल लॉन्च से यह सुनिश्चित हो गया है कि भारत का अपना नेविगेशन सिस्टम, ‘नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन’ फिर से काम करने लगा है। इससे विदेशी नेविगेशन सिस्टम पर देश की निर्भरता कम हुई…

गुवाहाटी, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों को बधाई दी। यह बधाई एनवीएस-03 नेविगेशन सैटेलाइट ले जाने वाले जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के सफल प्रक्षेपण के बाद दी गई। उन्होंने इस मिशन को भारत की स्वदेशी नेविगेशन क्षमताओं में एक बड़ा मील का पत्थर बताया।

एक्स पर पोस्ट में सीएम सरमा ने कहा कि इस सफल लॉन्च से यह सुनिश्चित हो गया है कि भारत का अपना नेविगेशन सिस्टम, ‘नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन’ फिर से काम करने लगा है। इससे विदेशी नेविगेशन सिस्टम पर देश की निर्भरता कम हुई है और सशस्त्र बलों की क्षमताएं मजबूत हुई हैं।

उन्होंने लिखा कि भारत की नेविगेशन क्षमताओं में एक मील का पत्थर। इसरो केजीएसएलवी-एफ18 के सफल लॉन्च ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि भारत का अपना नेविगेशन सिस्टम फिर से चालू हो गया है। इससे मैपिंग के लिए विदेशी संस्थाओं पर निर्भरता खत्म हुई है और हमारे सशस्त्र बलों की क्षमताएं मजबूत हुई हैं।

उन्होंने इस मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों को भी बधाई दी और कहा कि देश को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है।

जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट ने शुक्रवार रात 11:51 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी। इस रॉकेट में 2,232 किलोग्राम वजनी एनवीएस-03 उपग्रह (सैटेलाइट) मौजूद था। बाद में इसरो ने पुष्टि की कि उपग्रह को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित ‘जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट’ में स्थापित कर दिया गया है।

यह मिशन भारत के ‘जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल’ की 20वीं उड़ान थी। एनवीएस-03, इसरो की अगली पीढ़ी की नेविगेशन सैटेलाइट सीरीज का तीसरा उपग्रह है। इसे भारत के स्वदेशी क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम के तहत सेवाओं को निरंतर बनाए रखने और बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इस उपग्रह में स्वदेशी रूप से विकसित एक एटॉमिक क्लॉक के साथ-साथ अन्य जगहों से हासिल की गई एटॉमिक क्लॉक भी लगी हैं। इसमें पहले से मौजूद एल5 और एस-बैंड सिग्नलों के अलावा, एल1 नेविगेशन सिग्नल को भी शामिल किया गया है।

एनएवीआईसी भारत की मुख्य भूमि और उसकी भौगोलिक सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक के क्षेत्र में पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं प्रदान करता है। इसके उपयोग के दायरे में आम नागरिकों के लिए नेविगेशन, परिवहन, समुद्री संचालन और रणनीतिक रक्षा जरूरतें शामिल हैं।

यह सफल मिशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत लगातार अपने स्वदेशी अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है और जीपीएस जैसे विदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम पर अपनी निर्भरता को कम कर रहा है।

–आईएएनएस

डीकेएम/पीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.