कोलकाता, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के रायगंज के फरार ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) प्रशांत बर्मन कलकत्ता हाईकोर्ट के 48 घंटे के भीतर सरेंडर करने की डेडलाइन का पालन करने में नाकाम रहे। बर्मन राज्य में एक सोने के व्यापारी की हत्या के मामले में आरोपी हैं।
सरेंडर करने के बजाय प्रशांत बर्मन ने इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
6 अक्टूबर को कलकत्ता हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने आदेश दिया था कि अगर प्रशांत बर्मन सोने के व्यापारी स्वपन कामिल्या की हत्या के मामले में सरेंडर नहीं करते हैं, तो उनकी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
डिविजन बेंच ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि उनकी सैलरी का भुगतान तुरंत रोक दिया जाए, हालांकि अब इस मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। हाईकोर्ट के सरेंडर करने के निर्देश को मानने के बजाय बर्मन ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है।
पिछले साल अक्टूबर में जलपाईगुड़ी जिले के राजगंज के सस्पेंडेड बीडीओ प्रशांत बर्मन को पश्चिम मिदनापुर के रहने वाले गोल्ड ट्रेडर स्वपन कामिल्या की हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया था। जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्होंने निचली अदालत के सामने सरेंडर नहीं किया।
इसके बाद, रोड-सेफ्टी नियमों के उल्लंघन से जुड़े एक अलग मामले में बर्मन को गिरफ्तार किया गया और अगले ही दिन उन्हें जमानत मिल गई। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि बर्मन का पता नहीं चल पा रहा है। इससे पहले कोर्ट ने क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) से पूछा था कि वे उसे ढूंढने में नाकाम क्यों रहे।
पिछले साल प्रशांत बर्मन (जो उस समय राजगंज के बीडीओ थे) को साल्ट लेक के दत्ताबाद इलाके में सोने के व्यापारी स्वपन कामिल्या के अपहरण और हत्या के मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर पहचाना गया था, तब से वह फरार है।
–आईएएनएस
एएसएच/वीसी
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