सीएजी रिपोर्ट में खुलासा: ‘आप’ सरकार में डीटीसी ईपीएफ ट्रस्ट को ब्याज से 5.5 करोड़ रुपए का नुकसान

Summary :

नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को सीएजी की एक रिपोर्ट पेश की गई। इसमें अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पिछली ‘आप’ सरकार के दौरान डीटीसी ईपीएफ ट्रस्ट के अतिरिक्त फंड के निवेश में देरी के कारण ब्याज के तौर पर 5.5 करोड़ रुपए के संभावित नुकसान पर गंभीर टिप्पणी की गई है। ऑडिट के एक हिस्से में 2020-21 और 2022-23 के बीच डीटीसी के ईपीएफ ट्रस्ट की राशि को निवेश करने में देरी के कारण सरकार को हुए नुकसान की ओर इशारा किया गया। पैरा 2.8 में बताए गए संभावित नुकसान में एक महीने तक राशि…

नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को सीएजी की एक रिपोर्ट पेश की गई। इसमें अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पिछली ‘आप’ सरकार के दौरान डीटीसी ईपीएफ ट्रस्ट के अतिरिक्त फंड के निवेश में देरी के कारण ब्याज के तौर पर 5.5 करोड़ रुपए के संभावित नुकसान पर गंभीर टिप्पणी की गई है।

ऑडिट के एक हिस्से में 2020-21 और 2022-23 के बीच डीटीसी के ईपीएफ ट्रस्ट की राशि को निवेश करने में देरी के कारण सरकार को हुए नुकसान की ओर इशारा किया गया।

पैरा 2.8 में बताए गए संभावित नुकसान में एक महीने तक राशि का निवेश न करने के कारण लगभग 5.5 करोड़ रुपए का ब्याज नुकसान शामिल था।

सीएजी रिपोर्ट में कहा गया, “डीटीसी ईपीएफ ट्रस्ट अप्रैल 2020 से मार्च 2023 की अवधि के दौरान कर्मचारियों के प्रॉविडेंट फंड योगदान से मिली अतिरिक्त राशि का समय पर निवेश करने में विफल रहा, जिसके परिणामस्वरूप 5.50 करोड़ रुपए के ब्याज का संभावित नुकसान हुआ।”

इसमें कहा गया, “ऑडिट का मानना ​​है कि ट्रस्ट को अधिकारियों को नियुक्त करना चाहिए और उन्हें अतिरिक्त राशि के समय-समय पर निवेश की जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए, जैसा संबंधित नोटिफिकेशन में जरूरी है, और कर्मचारियों/हितधारकों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।”

एक अन्य हिस्से में, सीएजी रिपोर्ट के पैरा 2.7 में डीवाटरिंग (पानी निकालने) से संबंधित मात्रा में बदलाव के कारण 5.63 करोड़ रुपए के अनावश्यक भुगतान की ओर इशारा किया गया।

सीएजी रिपोर्ट में कहा गया, “काम को पूरा करने के दौरान डीवाटरिंग कार्यों के लिए तीन आइटम की अनुमानित मात्रा में 108 प्रतिशत से 2545 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई। मात्रा में भारी अंतर एग्रीमेंट में ली गई मात्रा में गलतियों के कारण था, जो सीधे तौर पर सबसॉइल वाटर (जमीन के नीचे के पानी) की गहराई और मल्टीप्लाइंग फैक्टर से संबंधित था।”

सीएजी रिपोर्ट में कहा गया, “अनुमानित मात्रा तय करने में वित्तीय समझदारी और उचित सावधानी न बरतने के कारण एग्रीमेंट के अनुसार स्वीकार्य सीमा से अधिक बदलाव हुआ और 5.63 करोड़ रुपए का अनावश्यक भुगतान करना पड़ा।”

विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की रिपोर्ट में दो सीएजी रिपोर्ट पेश करने की बात कही गई थी। इनमे एक 31 मार्च, 2023 को समाप्त वर्ष के लिए भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट नंबर 01/2026 और दूसरी ओर 2024-2025 के लिए राज्य के वित्त पर भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट नंबर 02/2026 है।

–आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.