केरल में जंगली हाथियों की लगातार हो रही मौतों से हड़कंप, सीबीआई जांच की मांग

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तिरुवनंतपुरम, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल में पर्यावरण समूहों ने राज्य में जंगली हाथियों की मौत की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने हाल के वर्षों में हाथियों की संख्या में भारी गिरावट और मृत्यु दर के ऊंचे स्तर का हवाला दिया है। उन्होंने केरल हाईकोर्ट की देखरेख में एक स्पेशल टीम से जांच की भी मांग की है। यह मांग पर्यावरण संगठनों और कार्यकर्ताओं की तीन दिन तक चली एक बैठक ‘वन स्पंदनम’ में उठाई गई। राज्य के वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, 2005 में केरल में अनुमानित 5,135 जंगली हाथी थे, हालांकि 2023 के अनुमान में यह…

तिरुवनंतपुरम, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल में पर्यावरण समूहों ने राज्य में जंगली हाथियों की मौत की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने हाल के वर्षों में हाथियों की संख्या में भारी गिरावट और मृत्यु दर के ऊंचे स्तर का हवाला दिया है।

उन्होंने केरल हाईकोर्ट की देखरेख में एक स्पेशल टीम से जांच की भी मांग की है। यह मांग पर्यावरण संगठनों और कार्यकर्ताओं की तीन दिन तक चली एक बैठक ‘वन स्पंदनम’ में उठाई गई।

राज्य के वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, 2005 में केरल में अनुमानित 5,135 जंगली हाथी थे, हालांकि 2023 के अनुमान में यह संख्या 2,386 थी और 2024 में यह आंकड़ा 1,793 था।

वन विभाग का कहना है कि हाथियों की संख्या में उतार-चढ़ाव का संबंध केरल और पड़ोसी राज्यों के बीच हाथियों की आवाजाही से भी हो सकता है।

सरकार द्वारा नियुक्त एक एक्सपर्ट कमेटी ने अप्रैल 2019 और मार्च 2025 के बीच केरल में 744 जंगली हाथियों की मौत दर्ज की।इसका मतलब है कि हर साल औसतन लगभग 124 मौतें हुईं। कमेटी ने सालाना मृत्यु दर का अनुमान 4.45 प्रतिशत से 6.2 प्रतिशत के बीच लगाया।

हाल की एक रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पहले किए गए मृत्यु दर के आकलन में 2011 और 2026 के बीच 1,260 हाथियों की मौत दर्ज की गई थी। इन आंकड़ों में प्राकृतिक और इंसानों की वजह से हुई मौतें शामिल हैं।

हाथियों की मौत के रिकॉर्ड की हालिया जीआईएस मैपिंग से एक खास भौगोलिक इलाके में इनके ज्यादा होने का भी पता चला है।

मैप किए गए 1,196 रिकॉर्ड में से 226 इडुक्की में थे, इसके बाद एर्नाकुलम में 203, पलक्कड़ में 152, वायनाड में 146 और मलप्पुरम में 140 रिकॉर्ड थे।

इन पांच जिलों में कुल 867 रिकॉर्ड थे, जो मैप की गई मौतों का लगभग 72.5 प्रतिशत है। अकेले इडुक्की, एर्नाकुलम और पलक्कड़ में 581 रिकॉर्ड थे, जो कुल मैप किए गए आंकड़ों का लगभग आधा है।

पर्यावरण समूहों का कहना है कि हाथियों के दांत मिलने से अवैध शिकार की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार हो रही मौतों से राज्य में जंगली हाथियों के लंबे समय तक बचे रहने पर खतरा पैदा हो सकता है।

हाथी प्रेमियों ने मौतों के कारणों और उनसे जुड़ी परिस्थितियों की विस्तृत और स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने हाथी कॉरिडोर की सुरक्षा करने और उनके आने-जाने के पारंपरिक रास्तों से रुकावटें हटाने की भी मांग की।

बैठक में इडुक्की के कलेक्टर डॉ. दिनेशान चेरुवट्ट द्वारा ऐसी रुकावटों को हटाने के लिए की गई पहल की सराहना की गई और उनके प्रति समर्थन जताया गया।

बैठक में कलेक्टर को कथित तौर पर धमकी देने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की गई। वायनाड नेचर कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष एन. बदुशा ने बैठक की अध्यक्षता की।

–आईएएनएस

एससीएच/वीसी

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IANS Agency

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