नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। देश में शाकाहारी थाली की कीमत मार्च में सालाना आधार पर स्थिर रही है और मांसाहारी थाली की कीमत में सालाना आधार पर एक प्रतिशत की गिरावट देखी गई। यह जानकारी क्रिसिल इंटेलिजेंस द्वारा सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च में घर पर पकी शाकाहारी थाली की लागत स्थिर रही। इसकी वजह प्याज, आलू और दालों की कम कीमतों का टमाटर, खाद्य तेल और ईंधन की बढ़ती कीमतों का भरपाई करना था। मांसाहारी थाली की लागत में गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण ब्रॉयलर मुर्गियों की कीमतों में अनुमानित 2 प्रतिशत की वार्षिक गिरावट थी, जो कुल लागत का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा होती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि प्रमुख क्षेत्रों में रोपाई में देरी के कारण टमाटर की कीमतों में वृद्धि हुई, जबकि प्याज की अधिक आपूर्ति के कारण कीमतों में गिरावट आई और आलू की कमजोर मांग ने कीमतों पर दबाव डाला है।
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में रोपाई में देरी के कारण, जिसने फसल के विकास, उपज और समय पर आवक को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया है, टमाटर की कीमतें मार्च 2026 में सालाना आधार पर 33 प्रतिशत बढ़कर 28 रुपए प्रति किलोग्राम हो गईं, यह मार्च 2025 में 21 रुपए प्रति किलोग्राम पर थीं।
खरीफ की देर से आने वाली फसल और रबी की कटाई के एक साथ होने से आपूर्ति अधिक होने और निर्यात कमजोर होने के कारण प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की गिरावट आई है।
खरीफ की देर से आने वाली प्याज की सीमित शेल्फ लाइफ को देखते हुए मजबूरी में बिक्री हो रही है। चालू वित्त वर्ष में अधिक शुरुआती स्टॉक के कारण दालों की कीमतों में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे कीमतों पर दबाव कुछ हद तक कम हुआ।
वैश्विक आपूर्ति में जारी व्यवधान के कारण वनस्पति तेल की कीमतों में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान के कारण एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे थालियों की कुल लागत में गिरावट सीमित रही है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुष्पन शर्मा ने कहा, “पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप जैव ईंधन क्षेत्र से बढ़ती मांग के चलते खाद्य तेल की कीमतों में भी उछाल आया है। इस महीने ताड़ और सूरजमुखी तेल की वैश्विक कीमतों में वृद्धि हुई, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी पड़ा। साथ ही, ऊंची कीमतों के कारण आयातकों ने सतर्कता बरती है, जिससे उन्होंने खरीद कम कर दी है और स्टॉक पर दबाव बढ़ गया है।”
उन्होंने आगे कहा, “निकट भविष्य में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण वनस्पति तेल की कीमतें ऊंची बनी रहने की संभावना है।”
–आईएएनएस
एबीएस/
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