नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। दिल्ली के प्रतिष्ठित और ब्रिटिश काल से जुड़े दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर अब सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा क्लब की 27.3 एकड़ जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर प्रधानमंत्री आवास के लिए इतनी बड़ी जमीन की जरूरत क्यों पड़ रही है जबकि भाजपा ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़ा फैसला बताया है।
भाजपा आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत का एक वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में सुरेंद्र राजपूत आरोप लगाते नजर आए कि दिल्ली जिमखाना क्लब की जमीन प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास लोक कल्याण मार्ग के विस्तार के लिए ली जा रही है।
वीडियो में सुरेंद्र राजपूत यह सवाल भी पूछते दिखाई दिए कि प्रधानमंत्री को रहने के लिए आखिर कितनी जमीन चाहिए? भाजपा को इसका जवाब देना होगा।
इस पर अमित मालवीय ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का 10 जनपथ स्थित आवास 15,181 वर्ग मीटर में फैला हुआ है जबकि 7 लोक कल्याण मार्ग का क्षेत्रफल 14,101 वर्ग मीटर है। अमित मालवीय ने तंज कसते हुए कहा, “लगता है सोनिया गांधी ने सुरेंद्र राजपूत को नोट भेजा है।” उन्होंने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड और विशेषाधिकार की राजनीति करने का आरोप भी लगाया।
ब्रिटिश दौर में शुरू हुआ दिल्ली जिमखाना क्लब राजधानी के बेहद पॉश और वीवीआईपी इलाके लुटियंस दिल्ली में स्थित है। यह क्लब लंबे समय से सत्ता के गलियारों से जुड़े प्रभावशाली लोगों की पसंदीदा जगह माना जाता रहा है। क्लब प्रधानमंत्री आवास 7,लोक कल्याण मार्ग के बेहद करीब स्थित है।
केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने 22 मई को क्लब प्रबंधन को बेदखली नोटिस जारी किया था। नोटिस में कहा गया कि 5 जून को क्लब परिसर का कब्जा केंद्र सरकार अपने हाथ में ले लेगी।
2, सफदरजंग रोड स्थित यह जमीन 1918 में क्लब को स्थायी लीज पर दी गई थी। अब इस जमीन को वापस लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अधिकार क्षेत्र में लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
सरकारी नोटिस में लीज की धारा 4 का हवाला देते हुए कहा गया कि यदि जमीन सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जरूरी हो, तो सरकार उसे वापस ले सकती है। सरकार ने कहा कि यह फैसला सार्वजनिक सुरक्षा और रक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए लिया गया है।
वहीं, क्लब प्रबंधन ने मंत्रालय से तुरंत बैठक की मांग की है ताकि सदस्यों और कर्मचारियों के हितों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके। साथ ही, क्लब प्रशासन इस फैसले को अदालत में चुनौती देने पर भी विचार कर रहा है।
इसी तरह केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास के सामने स्थित इंडियन पोलो एसोसिएशन को भी जमीन खाली करने का नोटिस भेजा है। वहां भी सरकार ने सुरक्षा और रक्षा से जुड़े सार्वजनिक उद्देश्यों का हवाला दिया है।
–आईएएनएस
वीकेयू/पीएम
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