केरल में चुनाव आयोग के सर्कुलर पर विवाद गहराया, सैकड़ों सोशल मीडिया यूजर्स को पुलिस ने भेजे नोटिस

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तिरुवनंतपुरम, 25 मार्च (आईएएनएस)। केरल में चुनाव आयोग के एक आधिकारिक सर्कुलर पर भाजपा की मुहर को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। इसी बीच, केरल पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 500 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट्स को नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने विवादित सर्कुलर की तस्वीर शेयर की थी। केरल पुलिस ने 270 ‘एक्स’ हैंडल, 200 फेसबुक पेज और 90 इंस्टाग्राम अकाउंट को नोटिस भेजे हैं। वहीं, पुलिस के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए फेसबुक और इंस्टाग्राम ने भी उस तस्वीर वाली पोस्ट हटा दी हैं, जबकि ‘एक्स’ पर कई पोस्ट अभी भी मौजूद हैं, जिससे अलग-अलग…

तिरुवनंतपुरम, 25 मार्च (आईएएनएस)। केरल में चुनाव आयोग के एक आधिकारिक सर्कुलर पर भाजपा की मुहर को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। इसी बीच, केरल पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 500 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट्स को नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने विवादित सर्कुलर की तस्वीर शेयर की थी।

केरल पुलिस ने 270 ‘एक्स’ हैंडल, 200 फेसबुक पेज और 90 इंस्टाग्राम अकाउंट को नोटिस भेजे हैं। वहीं, पुलिस के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए फेसबुक और इंस्टाग्राम ने भी उस तस्वीर वाली पोस्ट हटा दी हैं, जबकि ‘एक्स’ पर कई पोस्ट अभी भी मौजूद हैं, जिससे अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर नियमों के असमान पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

इस घटनाक्रम से राज्य में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों का इस्तेमाल मुख्य मुद्दे को सुलझाने के बजाय ऑनलाइन चर्चा को दबाने के लिए किया जा रहा है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं। खासकर इसलिए क्योंकि ये नोटिस उन यूजर्स को निशाना बना रहे हैं, जिन्होंने जनहित से जुड़े मामले से संबंधित सामग्री प्रसारित की थी।

हालांकि, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब चुनाव आयोग से जुड़ा एक आधिकारिक पत्र सामने आया, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुहर लगी हुई दिखाई दी। इससे इस संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता को लेकर बहस छिड़ गई। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और स्पष्टीकरण की मांग उठने लगी। बाद में चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण दिया कि मुहर का होना एक गलती थी।

हालांकि, पिछले 48 घंटों में यह विवाद सर्कुलर से हटकर पुलिस की कार्रवाई पर आ गया है। कानूनी विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों का कहना है कि गलत जानकारी और छेड़छाड़ की गई सामग्री पर रोक लगनी चाहिए, लेकिन कोई भी कार्रवाई आनुपातिक और पारदर्शी होनी चाहिए, खासकर जब इसमें कोई संवैधानिक संस्था शामिल हो।

गौरतलब है कि यह पूरा मामला केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव के बीच आया है। केरल में 9 अप्रैल को चुनाव होंगे, जिसमें 140 नए विधायक चुने जाएंगे।

–आईएएनएस

डीसीएच/

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