नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने गंभीर खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और सैनिटेशन संबंधी उल्लंघनों के पाए जाने के बाद सेवन सीज हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड का फूड बिजनेस लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। नियामक ने कंपनी को अगले आदेश तक सभी खाद्य व्यवसाय गतिविधियां बंद करने का निर्देश दिया है।
एफएसएसएआई के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कंपनी के खाद्य परिसर में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में खाद्य तैयारी क्षेत्रों में स्वच्छता और हाउसकीपिंग के बेहद खराब मानक पाए गए। अधिकारियों ने कई स्थानों पर पानी जमा होना, दुर्गंध, गंदगी और अस्वच्छ परिस्थितियां देखीं, जिससे खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हुईं।
नियामक ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कई खाद्य सामग्री खराब अवस्था में पाई गईं, जिनमें टमाटर, पपीता, गुड़, काजू और शिमला मिर्च शामिल थे, जिन पर फफूंद या सड़न के स्पष्ट संकेत मिले। इसके अलावा रसोई में काला पड़ चुका और गुणवत्ता खो चुका खाना पकाने का तेल भी उपयोग में पाया गया।
एफएसएसएआई ने कहा कि खाद्य भंडारण व्यवस्था भी तय मानकों के अनुरूप नहीं थी। निरीक्षण टीम ने शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण, मांस के रखरखाव में कमियां और कोल्ड स्टोरेज यूनिट के अंदर संघनन का पानी खाद्य पदार्थों पर टपकते हुए पाया।
जांच में कई बुनियादी ढांचागत खामियां भी सामने आईं। इनमें रेफ्रिजरेशन सिस्टम में लीकेज, अत्यधिक बर्फ जमना, उखड़ता प्लास्टर, अपर्याप्त कोल्ड स्टोरेज, खराब वेंटिलेशन और अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान परिसर में कॉकरोच और मक्खियों की मौजूदगी भी दर्ज की गई।
कार्रवाई के तहत लगभग 74 किलोग्राम/लीटर गैर-अनुपालक खाद्य सामग्री को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। निरीक्षण में संस्थान को केवल 30 प्रतिशत कंप्लायंस स्कोर मिला, जिसके कारण इसे “नॉन-कंप्लायंस” श्रेणी में रखा गया।
एफएसएसएआई ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए यह कार्रवाई की गई है। नियामक के अनुसार, लाइसेंस निलंबन की अवधि के दौरान कंपनी किसी भी प्रकार की खाद्य व्यवसाय गतिविधि संचालित नहीं कर सकेगी।
नियामक ने स्पष्ट किया कि खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए स्वच्छता, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षित भंडारण मानकों का पालन अनिवार्य है, और ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से समझौता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
–आईएएनएस
डीबीपी
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