ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा संरक्षण में निवेश को मिलेगा बढ़ावा: एक्सपर्ट्स

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नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद विशेषज्ञों ने कहा कि ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी से नवीकरणीय ऊर्जा और विविध आपूर्ति शृंखलाओं में निवेश तेज हो सकता है। इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा ने कहा कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा, “तेल आयात करने वाले देशों की आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है, औद्योगिक उत्पादन कमजोर हो सकता है…

नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद विशेषज्ञों ने कहा कि ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी से नवीकरणीय ऊर्जा और विविध आपूर्ति शृंखलाओं में निवेश तेज हो सकता है।

इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा ने कहा कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

उन्होंने कहा, “तेल आयात करने वाले देशों की आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है, औद्योगिक उत्पादन कमजोर हो सकता है और लोगों की खरीद क्षमता पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इससे नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण और विविध आपूर्ति शृंखलाओं में निवेश तेज हो सकता है। इस कारण यह संकट आर्थिक के साथ-साथ रणनीतिक चुनौती भी बन गया है।”

शर्मा ने कहा कि यह संकट ऊर्जा आपूर्ति के लिए राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को भी उजागर करता है।

उन्होंने बताया कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में इसका असर विदेशी मुद्रा भंडार और वित्तीय स्थिरता पर पड़ता है। साथ ही रुपए में कमजोरी आने से आयात खर्च और बढ़ सकता है।

वहीं, एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने कहा कि इस तरह के कदम लंबे समय में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी ला सकते हैं।

उन्होंने कहा, “ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से कुछ समय के लिए महंगाई बढ़ सकती है और परिवहन व उपभोग लागत पर असर पड़ सकता है। लेकिन यह भी दिखाता है कि सरकार वैश्विक अनिश्चितता के बीच ईंधन सब्सिडी को नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा पर ध्यान दे रही है।”

इसके अलावा, रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च डिपार्टमेंट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजीत मित्रा ने कहा कि फिलहाल ईंधन की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा, “वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें फरवरी में करीब 69 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं और फिलहाल 107 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं। इससे तेल विपणन कंपनियों पर लागत बढ़ने और मुनाफा घटने का दबाव बढ़ गया था।”

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 3.14 रुपए प्रति लीटर बढ़कर 97.77 रुपए हो गई, जबकि डीजल 3.11 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया।

पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल कंपनियों ने संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है। शुक्रवार से सीएनजी 2 रुपए प्रति किलोग्राम महंगी हो गई है। दिल्ली में अब इसकी नई कीमत 79.09 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है।

–आईएएनएस

डीबीपी

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