चेन्नई, 20 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु में ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) अपने कर्मचारियों के लिए एक व्यापक बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम शुरू करने की योजना बना रहा है। इसका मकसद काम करने की जगह पर अनुशासन को बेहतर बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी अपनी अनिवार्य आठ घंटे की काम की शिफ्ट पूरी करें।
यह कदम कर्मचारियों के समय पर काम पर न आने की बार-बार मिल रही शिकायतों और हाजिरी की निगरानी को लेकर जताई जा रही चिंताओं के जवाब में उठाया गया है, खासकर फील्ड-लेवल के कर्मचारियों के मामले में।
निगम के अधिकारियों ने बताया कि अलग-अलग जोन से शिकायतें सामने आई हैं; इनमें से अंबत्तूर जोन में सफाई निरीक्षकों (सैनिटरी इंस्पेक्टरों) से जुड़े आरोप और उनकी हाजिरी में अनियमितता की शिकायतें बार-बार मिल रही हैं।
इस प्रस्तावित व्यवस्था से जवाबदेही बढ़ने और पूरे निगम में कर्मचारियों के काम के शेड्यूल की निगरानी में सुधार होने की उम्मीद है। जीसीसी के रिकॉर्ड के मुताबिक, निगम में इस समय कुल 36,381 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिनमें 12,960 स्थायी कर्मचारी और 23,421 संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारी शामिल हैं।
कर्मचारियों की बड़ी संख्या और कई जोन व विभागों में फैले काम-काज के स्वरूप को देखते हुए, अधिकारियों का मानना है कि टेक्नोलॉजी पर आधारित हाजिरी व्यवस्था से प्रशासन को सुव्यवस्थित करने और कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
जीसीसी कमिश्नर जी.एस. समीरन ने इस बात की पुष्टि की कि सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी व्यवस्था शुरू करने की व्यावहारिकता पर शुरुआती चर्चा हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और इसके क्रियान्वयन की जरूरतों और परिचालन संबंधी प्रगति का और अधिक मूल्यांकन करने के बाद ही विस्तृत योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
प्रस्तावित रूपरेखा के तहत, कर्मचारियों को दिन में दो बार अपनी हाजिरी दर्ज करानी पड़ सकती है, एक बार अपनी शिफ्ट की शुरुआत में और दूसरी बार काम खत्म होने पर।
फील्ड निरीक्षण और बाहरी ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को भी एक मोबाइल-आधारित हाजिरी व्यवस्था के दायरे में लाया जा सकता है, जो ‘जियोफेंसिंग’ टेक्नोलॉजी से जुड़ी होगी। इस तरह की व्यवस्था हाजिरी दर्ज करते समय कर्मचारी की तस्वीर और उसकी लोकेशन (स्थान) की जानकारी भी ले लेगी, जिससे अधिकारी वास्तविक समय (रियल टाइम) में फील्ड में उनकी मौजूदगी की पुष्टि कर सकेंगे।
जीसीसी के पूर्व कमिश्नर जे. कुमारगुरुबरन ने बताया कि ‘फेस-रिकग्निशन’ (चेहरा पहचानने वाली) हाजिरी व्यवस्था शुरू करने पर पहले ही चर्चा हो चुकी है और फील्ड स्टाफ की हाजिरी के लिए एक मोबाइल ऐप भी पहले ही तैयार किया जा चुका है।
हालांकि, कर्मचारी संघों का दावा है कि अतीत में शुरू की गई इसी तरह की व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया था और उन्होंने इनके क्रियान्वयन में रह गई कमियों को लेकर चिंता जताई है। फिलहाल, बायोमेट्रिक हाजिरी व्यवस्था केवल ‘रिपन बिल्डिंग’ स्थित प्रशासनिक कर्मचारियों के लिए ही लागू है, जबकि कई वरिष्ठ अधिकारियों को इस व्यवस्था से छूट मिली हुई है।
–आईएएनएस
एससीएच/पीएम
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