पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सरकार गंभीर, कानूनों को और सख्त बनाने की तैयारी

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नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। सरकार परीक्षा में पेपर लीक रोकने और परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी के खिलाफ कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए और भी कड़े प्रावधान लाने की योजना बना रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य सजाओं को काफी बढ़ाना, जांच में तेजी लाना और संगठित परीक्षा में होने वाली धांधली पर अंकुश लगाने के लिए मुकदमों की प्रक्रिया को तेज करना है। सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित बदलाव भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 पर आधारित हैं। जहां 2024 का कानून पेपर लीक माफिया…

नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। सरकार परीक्षा में पेपर लीक रोकने और परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी के खिलाफ कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए और भी कड़े प्रावधान लाने की योजना बना रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य सजाओं को काफी बढ़ाना, जांच में तेजी लाना और संगठित परीक्षा में होने वाली धांधली पर अंकुश लगाने के लिए मुकदमों की प्रक्रिया को तेज करना है।

सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित बदलाव भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 पर आधारित हैं। जहां 2024 का कानून पेपर लीक माफिया के खिलाफ एक बड़ा निवारक साबित हुआ, वहीं सरकार अब इसके प्रावधानों को और भी सख्त बनाने का इरादा रखती है।

प्रस्तावित संशोधनों के तहत, पेपर लीक में शामिल व्यक्ति को पांच साल तक की कैद और 50 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है। परीक्षा आयोजित करने वाले सेवा प्रदाता पर 5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है और उसे आठ साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।

ऐसे सेवा प्रदाता के प्रबंधन को पांच साल की कैद और 5 करोड़ रुपए का जुर्माना हो सकता है। पेपर लीक में शामिल संगठित आपराधिक समूहों को सात साल की कैद और 10 करोड़ रुपए का जुर्माना हो सकता है।

सरकार का मानना ​​है कि इन बढ़ी हुई सजाओं से परीक्षा धोखाधड़ी के खिलाफ मजबूत रोकथाम होगी।

प्रस्तावित संशोधनों में पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी की जांच के लिए वैधानिक विशेष कार्य बलों का भी प्रावधान है। किसी भी पेपर लीक मामले की जांच विशेष कार्य बल गठित करके की जा सकती है, जिसे दो महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी। इससे त्वरित जांच और अधिक लक्षित अभियोजन सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

इसके अतिरिक्त, संशोधनों में विशेष त्वरित न्यायालयों के लिए वैधानिक प्रावधान प्रस्तावित हैं। राज्य सरकारों को संबंधित उच्च न्यायालयों के परामर्श से इन न्यायालयों की स्थापना करनी होगी। न्यायालय प्रतिदिन के आधार पर मामलों की सुनवाई करेंगे और तीन महीने के भीतर मुकदमों को पूरा करेंगे।

प्रस्तावों में आगे यह प्रावधान किया गया है कि सभी लंबित जांच विशेष कार्य बलों को सौंप दी जाएंगी, जबकि सभी लंबित मामलों को तीन महीने के भीतर निपटान के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इनमें जांच संबंधी मामलों के लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का भी प्रावधान है।

सूत्रों के अनुसार, इन संशोधनों से अपराध निवारण को मजबूती मिलेगी, जांच में तेजी आएगी और अपराधियों को त्वरित दंड सुनिश्चित होगा।

–आईएएनएस

एमएस/

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